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TPA धारा 8: अन्तरण का प्रभाव

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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8. अन्तरण का प्रभाव -

जब तक कि कोई भिन्न आशय अभिव्यक्त न हो या आवश्यक रूप से विवक्षित न हो, सम्पत्ति का अन्तरण अन्तरिती को तत्काल ही सम्पत्ति में के और उसकी विधिक प्रसंगतियों में के उस समस्त हित का संक्रामण कर देता है जिसका संक्रामण करने के लिए अन्तरक तब समर्थ हो-

ऐसी प्रसंगतियों के अन्तर्गत आते हैं, जहाँ  कि सम्पत्ति भूमि हो, वहां उससे उपाबद्ध सुखाचार, अन्तरण के पश्चात् प्रोद्भवमान उसके भाटक और लाभ तथा भूबद्ध सब चीजें, और जहां कि संपत्ति भूबद्ध मशीनरी हो, वहां उसके जंगम भाग और जहां कि संपत्ति कोई गृह हो वहां उसके उपाबद्ध सुखाचार, अन्तरण के पश्चात् प्रोद्भवमान उसका भाटक और उसके साथ स्थायी उपयोग के लिए उपबन्धित उसके ताले, चाबियाँ, छड़ें, द्वार, खिड़कियां और अन्य सब चीजें,

और जहां कि संपत्ति कोई ऋण या अन्य अनुयोज्य दावा हो वहां उसके लिए प्रतिभूतियां (उस दशा के सिवाय जिसमें वे ऐसे अन्य ऋणों या दावों के लिए भी हैं, जिन्हें अन्तरिती को अन्तरित नहीं किया गया है), किन्तु अन्तरण के पूर्व प्रोद्भूत व्याज की बकाया नहीं;

और जहां कि संपत्ति धन या आय देने वाली अन्य सम्पत्ति हो, वहां अंतरण के प्रभावशील होने के पश्चात् प्रोद्भवमान उसका ब्याज या आय।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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