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TPA धारा 38: कुछ परिस्थितियों में ही अन्तरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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38. कुछ परिस्थितियों में ही अन्तरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण-

जहाँ कि कोई व्यक्ति जो ऐसी परिस्थितियों में ही, जिनमें प्रकृत्या फेरफार होता रहता है, स्थावर सम्पत्ति का व्ययन करने के लिए प्राधिकृत है, ऐसी परिस्थितियों के वर्तमान होने का अभिकथन करके ऐसी सम्पत्ति को प्रतिफल के लिए अन्तरित करता है वहाँ यदि अन्तरिती ने ऐसी परिस्थितियों में होने का अभिनिश्चय करने के लिए युक्तियुक्त सावधानी बरतने के पश्चात् सद्भावपूर्वक कार्य किया है, तो जहाँ तक एक ओर अन्तरिती का और दूसरी ओर अन्तरक और ऐसे अन्य व्यक्तियों के (यदि कोई हो), जिन पर प्रभाव पड़ा है, बीच का संबंध है, यह समझा जाएगा कि वे परिस्थितियाँ वर्तमान थीं।

दृष्टान्त

हिन्दू विधवा क जिसका पति संपार्शिवक वारिस छोड़ गया है, यह अभिकथित करते हुए कि ऐसे रूप में उसके द्वारा धारित सम्पत्ति उसके भरण-पोषण के लिए अपर्याप्त है, एक खेत को, जो उस सम्पत्ति का भाग है ख को ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो न तो धार्मिक है और न खैराती है, बेचने का करार करती है, ख युक्तियुक्त जाँच के बाद अपना यह समाधान कर लेता है कि क के भरण-पोषण के लिए सम्पत्ति की आय अपर्याप्त है और खेत का विक्रय आवश्यक है, और सद्भावपूर्वक कार्य करते हुए क से खेत खरीद लेता है। जहाँ तक कि एक ओर ख और दूसरी ओर क और संपार्शिवक वारिसों के बीच का संबंध है, यह समझा जाएगा कि उक्त विक्रय की आवश्यकता वर्तमान थी।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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