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TPA धारा 51: त्रुटियुक्त हकों के अधीन सद्भावपूर्वक धारकों द्वारा की गयी अभिवृद्धियाँ

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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51. त्रुटियुक्त हकों के अधीन सद्भावपूर्वक धारकों द्वारा की गयी अभिवृद्धियाँ -

जबकि स्थावर सम्पत्ति का अन्तरिती सद्भावपूर्वक यह विश्वास करते हुए कि उस पर उसका आत्यन्तिक हक है, सम्पत्ति में अभिवृद्धि करता है, किन्तु पीछे बेहत्तर

हक रखने वाले किसी व्यक्ति द्वारा वह उससे बेदखल कर दिया जाता है तब बेदखल करने वाले व्यक्ति से यह अपेक्षा करने का अन्तरिती को अधिकार है कि वह या तो अभिवृद्धि के मूल्य को प्राक्कलित कराए और उसे अन्तरिती को दिलाए या प्रतिभूत कराए अथवा अपने उस हित को, जो उस सम्पत्ति में उसे हो ऐसी अभिवृद्धि के मूल्य को दृष्टि में लाए बिना अन्तरिती को तत्कालीन बाजार भाव पर बेच दे।

जो रकम ऐसी अभिवृद्धि के लिए दी जानी या प्रतिभूत की जानी है वह बेदखली के समय का उसका प्राक्कलित मूल्य होगी।

जबकि अन्तरिती ने उस सम्पत्ति में पूर्वोक्त परिस्थितियों के अधीन ऐसी फसल लगाई या बोई हो, जो उसके वहाँ से बेदखल होने के समय से उगी हुई है, तब वह ऐसी फसलों का और उन्हें एकत्रित करने और ले जाने के लिए सम्पत्ति पर अबाध रूप से आने-जाने का हकदार है।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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