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TPA धारा 12: दिवाले या प्रयतित अन्य-संक्रामण पर हित को पर्यवसेय बनाने वाली शर्त

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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12. दिवाले या प्रयतित अन्य-संक्रामण पर हित को पर्यवसेय बनाने वाली शर्त -

जहां कि इस शर्त या मर्यादा के अध्यधीन सम्पत्ति अन्तरित की जाती है कि किसी व्यक्ति को या उसके फायदे के लिए आरक्षित या दिया हुआ उस सम्पत्ति में का कोई भी हित उस व्यक्ति के दिवालिया होने पर या उसके अन्तरण या व्ययन करने का प्रयास करने पर समाप्त हो जाएगा, वहां ऐसी शर्त या मर्यादा शून्य है।

इस धारा की कोई भी बात पट्टे में की किसी ऐसी शर्त को लागू न होगी जो पट्टाकर्ता या उससे व्युत्पन्न अधिकाराधीन दावा करने वालों के फायदे के लिए हो।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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