Bबनाका ऐप स्टूडियो

TPA धारा 45: प्रतिफलार्थ संयुक्त अन्तरण

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

अध्याय मार्गदर्शक पढ़ें और अभ्यास करें →

अन्य भाषाओं में भी: English

45. प्रतिफलार्थ संयुक्त अन्तरण -

जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति दो या अधिक व्यक्तियों को प्रतिफलार्थ अन्तरित की जाती है और ऐसा प्रतिफल किसी ऐसी निधि में से दिया जाता है जो उनकी साझे की है, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में वे ऐसी सम्पत्ति में उन हितों के क्रमशः हकदार होंगे जो उन हितों के यथाशक्य समान होंगे जिनके वे उस निधि में क्रमशः हकदार थे और जहाँ कि ऐसा प्रतिफल उसकी अपनी-अपनी पृथक् निधियों में से दिया जाता है वहाँ कोई तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो वे ऐसी सम्पत्ति में हित के हकदार क्रमशः उसी अनुपात में होंगे जो प्रतिफल के उन अंशों का है जिन्हें उन्होंने क्रमशः दिया था।

इस बात के बारे में साक्ष्य के अभाव में कि उस निधि में वे किसी हित के क्रमशः हकदार थे या उन्होंने क्रमशः कितना अंश दिया था यह उपधारणा की जाएगी कि वे व्यक्ति उस सम्पत्ति में बराबर का हित रखते हैं।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

यह पाठ केवल संदर्भ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।

इस अध्याय की अन्य धाराएँ