TPA धारा 46: सुभिन्न हित रखने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रतिफलार्थ अन्तरण
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण
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46. सुभिन्न हित रखने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रतिफलार्थ अन्तरण-
जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति उसमें सुभिन्न हित रखने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रतिफलार्थ अन्तरित की जाती है, वहाँ कोई तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो वे अन्तरक, जहाँ कि उस सम्पत्ति में उनके हित बराबर मूल्य के हों, वहाँ प्रतिफल में से बराबर-बराबर अंश और, जहाँ कि ऐसे हित असमान मूल्य के हों, वहाँ अपने-अपने हितों के मूल्य के अनुपात में अंश पाने के हकदार हैं।
दृष्टान्त
(क) सुल्तानपुर मौजे में क का अंश आधा और ख और ग में से हर एक का एक-चौथाई है। वे इस मौजे के आठवें अंश का लालपुर मौजे में एक चौथाई अंश से विनिमय कर लेते हैं। कोई तत्प्रतिकूल करार नहीं है इसलिए क लालपुर में आठवें अंश का और ख और ग हर एक उस मौजे में सोलहवें अंश का हकदार हैं।
(ख) अतरौली मौजे में क, जो आजीवन हित का, और ख और ग, जो उस मौजे के शेष भाग के हकदार हैं, उस मौजे को 1000 रुपए में बेच देते हैं। क के आजीवन हित का मूल्य 600 रुपए और शेष भाग का मूल्य 400 रुपए अभिनिश्चित किया जाता है। क क्रयधन में से 600 रुपए और ख और ग 400 रुपए पाने के हकदार हैं।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 5. संपत्ति के अंतरण की परिभाषा
- 6. क्या अंतरित किया जा सकेगा
- 7. अन्तरण करने के लिए सक्षम व्यक्ति
- 8. अन्तरण का प्रभाव
- 9. मौखिक अंतरण
- 10. अन्य-संक्रामण अवरुद्ध करने वाली शर्त
- 11. स्रष्ट हित के विरुद्ध निर्बन्धन
- 12. दिवाले या प्रयतित अन्य-संक्रामण पर हित को पर्यवसेय बनाने वाली शर्त
- 13. अजात व्यक्ति के फायदे के लिए अंतरण
- 14. शाश्वतता के विरुद्ध नियम
- 15. उस वर्ग को अंतरण, जिसमें के कुछ व्यक्ति धारा 13 और 14 के अन्दर जाते हैं
- 16. अन्तरण का किसी पूर्विक हित की निष्फलता पर प्रभावी होना
- 17. संचयन के लिए निवेश
- 18. लोक के फायदे के लिए शाश्वतिक अंतरण
- 19. निहित हित
- 20. अजात व्यक्ति अपने फायदे के लिए किए गए अन्तरण पर कब निहित हित अर्जित करता है
- 21. समाश्रित हित
- 22. किसी वर्ग के ऐसे सदस्यों को अन्तरण जो किसी विशिष्ट आयु को प्राप्त करें
- 23. अंतरण जो, विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने पर समाश्रित है
- 24. निश्चित व्यक्तियों में से ऐसे व्यक्तियों को अन्तरण जो अविनिर्दिष्ट कालावधि पर उत्तरजीवी हों
- 25. सशर्त अन्तरण
- 26. पुरोभावय शर्त की पूर्ति
- 27. एक व्यक्ति को सशर्त अन्तरण ऐसे अन्तरण के साथ जो पूर्विक व्ययन के निष्फल होने पर दूसरे व्यक्ति के पक्ष में हो जाएगा
- 28. परवर अन्तरण का विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने या न होने की शर्त पर आश्रित होना
- 29. उत्तरभाव्य शर्त की पूर्ति
- 30. पूर्विक व्ययन का परतर व्ययन की अविधिमान्यता द्वारा प्रभावित न होना
- 31. यह शर्त की अन्तरण विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने या न होने की दशा में प्रभावी न रहेगा
- 32. ऐसी शर्त अविधिमान्य नहीं होनी चाहिए
- 33. कार्य करने की शर्त पर अन्तरण जबकि उस कार्य के करने के लिए कोई समय विनिर्दिष्ट नहीं है
- 34. कार्य करने की शर्त पर आश्रित अन्तरण जबकि समय विनिर्दिष्ट है
- 35. निर्वाचन कब आवश्यक है
- 36. हकदार व्यक्ति के हित के पर्यवसान पर कालिक संदायों का प्रभाजन
- 37. विभाजन पर बाध्यता के फायदे का प्रभाजन
- 38. कुछ परिस्थितियों में ही अन्तरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण
- 39. अन्तरण, जहाँ कि अन्य व्यक्ति भरण-पोषण का हकदार है
- 40. भूमि के उपयोग पर निर्बन्धन लगाने वाली बाध्यता का या स्वामित्व से उपाबद्ध
- 41. दृश्यमान स्वामी द्वारा अन्तरण
- 42. पूर्वत्तर अन्तरण का प्रतिसंहरण करने का प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा अन्तरण
- 43. अप्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण, जो अन्तरित सम्पत्ति में पीछे हित अर्जित कर लेता है
- 44. एक सह-स्वामी द्वारा अन्तरण
- 45. प्रतिफलार्थ संयुक्त अन्तरण
- 47. सामान्य सम्पत्ति में के अंश का सह-स्वामियों द्वारा अन्तरण
- 48. अन्तरण द्वारा सृष्ट अधिकारों की पूर्विकता
- 49. बीमा पालिसी के अधीन अन्तरिती का अधिकार
- 50. त्रुटियुक्त हक के अधीन धारक को सद्भावपूर्वक दिया गया भाटक
- 51. त्रुटियुक्त हकों के अधीन सद्भावपूर्वक धारकों द्वारा की गयी अभिवृद्धियाँ
- 52. सम्पत्ति-संबंधी वाद के लम्बित रहते हुए सम्पत्ति का अन्तरण
- 53. कपटपूर्ण अन्तरण
- 53A. भागिक पालन