TPA धारा 35: निर्वाचन कब आवश्यक है
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण
अध्याय मार्गदर्शक पढ़ें और अभ्यास करें →
अन्य भाषाओं में भी: English
35. निर्वाचन कब आवश्यक है
जहां कि कोई व्यक्ति ऐसी सम्पत्ति अन्तरित करने की प्रव्यंजना करता है, जिसे अन्तरित करने का उसे कोई अधिकार नहीं है और उसी संव्यवहार के भागरूप कोई फायदा उस सम्पत्ति के स्वामी को प्रदत्त करता है वहां ऐसे स्वामी को निर्वाचन करना होगा कि वह या तो ऐसे अन्तरण को पुष्ट करे या उससे विसम्मत हो और पश्चात्कथित दशा में वह ऐसे प्रदत्त फायदे का त्याग करेगा और इस प्रकार त्यस्त फायदा अन्तरक या उसके प्रतिनिधि को ऐसे प्रतिवर्तित हो जाएगा, मानो वह व्ययनित ही नहीं हुआ था, तथापि-
जहाँ कि अन्तरण आनुग्रहिक है और जहां अन्तरक निर्वाचन किए जाने से पहले मर गया है या नवीन अन्तरण करने के लिए अन्यथा असमर्थ हो गया है,
और उन सब दशाओं में, जिनमें अन्तरण प्रतिफलार्थ है, निराश अन्तरिती को प्रतिफल की रकम या उस सम्पत्ति के, जिसे उसको अन्तरित किए जाने का प्रयत्न किया गया था, मूल्य को चुका देने के भार के अध्यधीन ही वह फायदा प्रतिवर्तित होगा।
दृष्टांत
सुल्तानपुर का खेत ग की सम्पत्ति है और उसका मूल्य 800 रुपए है क उसे दान की लिखत द्वारा ख को अंतरित करने की प्रव्यंजना करता है और उसी लिखत द्वारा ग को 1,000 रुपए देता है। ग खेत को अपने पास रखना निर्वाचित करता है। 1,000 रुपए का दान उससे समपहृत हो जाता है।
उसी मामले में क निर्वाचन के पहले मर जाता है। उसका प्रतिनिधि 1,000 रुपए में से 800 रुपए ख को देगा।
इस धारा के प्रथम पैरा का नियम लागू होता है चाहे अन्तरक यह विश्वास करता हो या न करता हो कि जिसका अन्तरण करने की वह प्रव्यंजना करता है, वह स्वयं उसकी अपनी है।
जो व्यक्ति किसी संव्यवहार के अधीन कोई फायदा सीधा नहीं लेता किन्तु उसके अधीन फायदा उसे परतः व्युत्पन्न होता है। उसे निर्वाचन करने की आवश्यकता नहीं है।
जो व्यक्ति अपनी किसी एक हैसियत में कोई फायदा उस संव्यवहार के अधीन लेता है, वह किसी अन्य हैसियत में उससे विसम्मत हो सकेगा।
अंतिम पूर्ववर्ती चारों नियमों का अपवाद -
जहां कि उस सम्पत्ति के स्वामी को, जिसका अन्तरण करने की अन्तरक प्रव्यंजना करता है, कोई विशिष्ट फायदा प्रदत्त किया जाना अभिव्यक्त किया गया है और ऐसा फायदा उस सम्पत्ति के बदले में किया जाना अभिव्यक्त है, वहां यदि ऐसा स्वामी सम्पत्ति का दावा करे तो उसे विशिष्ट फायदे का त्याग करना होगा किन्तु वह उसी संव्यहार द्वारा उसे प्रदत्त किसी अन्य फायदे को त्यागने के लिए आबद्ध नहीं है।
जिस व्यक्ति को फायदा प्रदत्त किया गया है उस व्यक्ति द्वारा प्रतिग्रहण ही अन्तरण की पुष्टि के लिए उस द्वारा किया गया निर्वाचन गठित करता है, यदि वह निर्वाचन करने के अपने कर्तव्य को जानता हो और उन परिस्थितियों को जानता हो जो निर्वाचन करने में किसी युक्तिमान मनुष्य के निर्णय पर प्रभाव डालती है, अथवा यदि वह उन परिस्थितियों की जांच करने का अधित्यजन कर देता है।
यदि वह व्यक्ति, जिसे वह फायदा प्रदत्त किया गया है, विसम्मति अभिव्यक्त करने के लिए कोई कार्य किए बिना उसका उपभोग दो वर्ष तक कर लेता है तो ऐसा ज्ञान या अधित्यजन तत्प्रतिकूल साक्ष्य के अभाव में उपधारित कर लिया जाएगा।
ऐसा ज्ञान या अधित्वजन उसके किसी ऐसे कार्य से अनुमित किया जा सकेगा जिसने उस सम्पत्ति में, जिसके अन्तरित करने की प्रव्यंजना की गई है हितबद्ध व्यक्तियों को उसी दशा में रखना असम्भव बना दिया है जिसमें वे होते यदि वह कार्य न किया गया होता।
दृष्टांत
ख को क एक सम्पदा अन्तरित करता है, जिसका ग हकदार है, और उस संव्यहार के भागरूप ग को कोयले की एक खान देता है। ग खान को कब्जे में लेता है और उसे निःशेष कर देता है। तद्द्वारा उसने सम्पदा के ख को अन्तरण की पुष्टि कर दी है।
यदि वह अन्तरण की तारीख से एक वर्ष के भीतर अन्तरण की पुष्टि करने का या उससे विसम्मति का अपना आशय अन्तरक या उसके प्रतिनिधि को जता नहीं देता, तो अन्तरक या उसका प्रतिनिधि उस कालावधि के अवसान पर उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह निर्वाचन करे और यदि वह ऐसी अपेक्षा की प्राप्ति के पश्चात् युक्तियुक्त समय के भीतर उसका पालन नहीं करता तो यह समझा जाएगा कि उसने उस अन्तरण की पुष्टि करने का निर्वाचन कर लिया है।
निर्योग्यता की दशा में निर्वाचन उस समय तक मुल्तवी रहेगा, जब तक उस निर्योग्यता का अन्त नहीं हो जाता, या जब तक निर्वाचन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं किया जाता।
प्रभावन
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
यह पाठ केवल संदर्भ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 5. संपत्ति के अंतरण की परिभाषा
- 6. क्या अंतरित किया जा सकेगा
- 7. अन्तरण करने के लिए सक्षम व्यक्ति
- 8. अन्तरण का प्रभाव
- 9. मौखिक अंतरण
- 10. अन्य-संक्रामण अवरुद्ध करने वाली शर्त
- 11. स्रष्ट हित के विरुद्ध निर्बन्धन
- 12. दिवाले या प्रयतित अन्य-संक्रामण पर हित को पर्यवसेय बनाने वाली शर्त
- 13. अजात व्यक्ति के फायदे के लिए अंतरण
- 14. शाश्वतता के विरुद्ध नियम
- 15. उस वर्ग को अंतरण, जिसमें के कुछ व्यक्ति धारा 13 और 14 के अन्दर जाते हैं
- 16. अन्तरण का किसी पूर्विक हित की निष्फलता पर प्रभावी होना
- 17. संचयन के लिए निवेश
- 18. लोक के फायदे के लिए शाश्वतिक अंतरण
- 19. निहित हित
- 20. अजात व्यक्ति अपने फायदे के लिए किए गए अन्तरण पर कब निहित हित अर्जित करता है
- 21. समाश्रित हित
- 22. किसी वर्ग के ऐसे सदस्यों को अन्तरण जो किसी विशिष्ट आयु को प्राप्त करें
- 23. अंतरण जो, विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने पर समाश्रित है
- 24. निश्चित व्यक्तियों में से ऐसे व्यक्तियों को अन्तरण जो अविनिर्दिष्ट कालावधि पर उत्तरजीवी हों
- 25. सशर्त अन्तरण
- 26. पुरोभावय शर्त की पूर्ति
- 27. एक व्यक्ति को सशर्त अन्तरण ऐसे अन्तरण के साथ जो पूर्विक व्ययन के निष्फल होने पर दूसरे व्यक्ति के पक्ष में हो जाएगा
- 28. परवर अन्तरण का विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने या न होने की शर्त पर आश्रित होना
- 29. उत्तरभाव्य शर्त की पूर्ति
- 30. पूर्विक व्ययन का परतर व्ययन की अविधिमान्यता द्वारा प्रभावित न होना
- 31. यह शर्त की अन्तरण विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने या न होने की दशा में प्रभावी न रहेगा
- 32. ऐसी शर्त अविधिमान्य नहीं होनी चाहिए
- 33. कार्य करने की शर्त पर अन्तरण जबकि उस कार्य के करने के लिए कोई समय विनिर्दिष्ट नहीं है
- 34. कार्य करने की शर्त पर आश्रित अन्तरण जबकि समय विनिर्दिष्ट है
- 36. हकदार व्यक्ति के हित के पर्यवसान पर कालिक संदायों का प्रभाजन
- 37. विभाजन पर बाध्यता के फायदे का प्रभाजन
- 38. कुछ परिस्थितियों में ही अन्तरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण
- 39. अन्तरण, जहाँ कि अन्य व्यक्ति भरण-पोषण का हकदार है
- 40. भूमि के उपयोग पर निर्बन्धन लगाने वाली बाध्यता का या स्वामित्व से उपाबद्ध
- 41. दृश्यमान स्वामी द्वारा अन्तरण
- 42. पूर्वत्तर अन्तरण का प्रतिसंहरण करने का प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा अन्तरण
- 43. अप्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण, जो अन्तरित सम्पत्ति में पीछे हित अर्जित कर लेता है
- 44. एक सह-स्वामी द्वारा अन्तरण
- 45. प्रतिफलार्थ संयुक्त अन्तरण
- 46. सुभिन्न हित रखने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रतिफलार्थ अन्तरण
- 47. सामान्य सम्पत्ति में के अंश का सह-स्वामियों द्वारा अन्तरण
- 48. अन्तरण द्वारा सृष्ट अधिकारों की पूर्विकता
- 49. बीमा पालिसी के अधीन अन्तरिती का अधिकार
- 50. त्रुटियुक्त हक के अधीन धारक को सद्भावपूर्वक दिया गया भाटक
- 51. त्रुटियुक्त हकों के अधीन सद्भावपूर्वक धारकों द्वारा की गयी अभिवृद्धियाँ
- 52. सम्पत्ति-संबंधी वाद के लम्बित रहते हुए सम्पत्ति का अन्तरण
- 53. कपटपूर्ण अन्तरण
- 53A. भागिक पालन