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TPA धारा 30: पूर्विक व्ययन का परतर व्ययन की अविधिमान्यता द्वारा प्रभावित न होना

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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30. पूर्विक व्ययन का परतर व्ययन की अविधिमान्यता द्वारा प्रभावित न होना -

यदि परतर व्ययन विधिमान्य न हो, तो पूर्विक व्ययन पर उसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

दृष्टांत

क एक फार्म को उसके जीवनपर्यन्त के लिए तथा यदि वह अपने पति का अभित्यजन न करे, तो ग को अन्तरित करता है। ख अपने जीवन पर्यन्त फार्म की ऐसे हकदार है मानो शर्त अन्तःस्थापित थी ही नहीं।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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