TPA धारा 31: यह शर्त की अन्तरण विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने या न होने की दशा में प्रभावी न रहेगा
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण
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31. यह शर्त की अन्तरण विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने या न होने की दशा में प्रभावी न रहेगा -
धारा 12 के उपबन्धों के अध्यधीन यह है कि सम्पत्ति के अन्तरण पर उस सम्पत्ति में कोई हित इस अधियोजित शर्त के साथ सृष्ट किया जा सकेगा कि किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने की दशा में या किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित न होने की दशा में उसके अस्तित्व का अन्त हो जाएगा।
दृष्टांत
(क). क कोई फार्म ख को उसके, जीवनपर्यन्त के लिए इस उपबंध के साथ अन्तरित करता है कि यदि ख ने अमुक जंगल को काटा तो अन्तरण के प्रभाव का अन्त हो जाएगा। ख जंगल काट डालता है। यह फार्म में अपना आजीवन हित खो देता है।
(ख). क कोई फार्म ख को इस उपबंध के साथ अन्तरित करता है कि यदि अन्तरण की तारीख के पश्चात् तीन वर्ष के भीतर ख इंग्लैंड न जाएगा तो फार्म में उसके हित का अन्त हो जाएगा। ख विहित अवधि के भीतर इंग्लैंड नहीं जाता। फार्म में उस हित का अन्त हो जाता है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 5. संपत्ति के अंतरण की परिभाषा
- 6. क्या अंतरित किया जा सकेगा
- 7. अन्तरण करने के लिए सक्षम व्यक्ति
- 8. अन्तरण का प्रभाव
- 9. मौखिक अंतरण
- 10. अन्य-संक्रामण अवरुद्ध करने वाली शर्त
- 11. स्रष्ट हित के विरुद्ध निर्बन्धन
- 12. दिवाले या प्रयतित अन्य-संक्रामण पर हित को पर्यवसेय बनाने वाली शर्त
- 13. अजात व्यक्ति के फायदे के लिए अंतरण
- 14. शाश्वतता के विरुद्ध नियम
- 15. उस वर्ग को अंतरण, जिसमें के कुछ व्यक्ति धारा 13 और 14 के अन्दर जाते हैं
- 16. अन्तरण का किसी पूर्विक हित की निष्फलता पर प्रभावी होना
- 17. संचयन के लिए निवेश
- 18. लोक के फायदे के लिए शाश्वतिक अंतरण
- 19. निहित हित
- 20. अजात व्यक्ति अपने फायदे के लिए किए गए अन्तरण पर कब निहित हित अर्जित करता है
- 21. समाश्रित हित
- 22. किसी वर्ग के ऐसे सदस्यों को अन्तरण जो किसी विशिष्ट आयु को प्राप्त करें
- 23. अंतरण जो, विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित होने पर समाश्रित है
- 24. निश्चित व्यक्तियों में से ऐसे व्यक्तियों को अन्तरण जो अविनिर्दिष्ट कालावधि पर उत्तरजीवी हों
- 25. सशर्त अन्तरण
- 26. पुरोभावय शर्त की पूर्ति
- 27. एक व्यक्ति को सशर्त अन्तरण ऐसे अन्तरण के साथ जो पूर्विक व्ययन के निष्फल होने पर दूसरे व्यक्ति के पक्ष में हो जाएगा
- 28. परवर अन्तरण का विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने या न होने की शर्त पर आश्रित होना
- 29. उत्तरभाव्य शर्त की पूर्ति
- 30. पूर्विक व्ययन का परतर व्ययन की अविधिमान्यता द्वारा प्रभावित न होना
- 32. ऐसी शर्त अविधिमान्य नहीं होनी चाहिए
- 33. कार्य करने की शर्त पर अन्तरण जबकि उस कार्य के करने के लिए कोई समय विनिर्दिष्ट नहीं है
- 34. कार्य करने की शर्त पर आश्रित अन्तरण जबकि समय विनिर्दिष्ट है
- 35. निर्वाचन कब आवश्यक है
- 36. हकदार व्यक्ति के हित के पर्यवसान पर कालिक संदायों का प्रभाजन
- 37. विभाजन पर बाध्यता के फायदे का प्रभाजन
- 38. कुछ परिस्थितियों में ही अन्तरण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण
- 39. अन्तरण, जहाँ कि अन्य व्यक्ति भरण-पोषण का हकदार है
- 40. भूमि के उपयोग पर निर्बन्धन लगाने वाली बाध्यता का या स्वामित्व से उपाबद्ध
- 41. दृश्यमान स्वामी द्वारा अन्तरण
- 42. पूर्वत्तर अन्तरण का प्रतिसंहरण करने का प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा अन्तरण
- 43. अप्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण, जो अन्तरित सम्पत्ति में पीछे हित अर्जित कर लेता है
- 44. एक सह-स्वामी द्वारा अन्तरण
- 45. प्रतिफलार्थ संयुक्त अन्तरण
- 46. सुभिन्न हित रखने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रतिफलार्थ अन्तरण
- 47. सामान्य सम्पत्ति में के अंश का सह-स्वामियों द्वारा अन्तरण
- 48. अन्तरण द्वारा सृष्ट अधिकारों की पूर्विकता
- 49. बीमा पालिसी के अधीन अन्तरिती का अधिकार
- 50. त्रुटियुक्त हक के अधीन धारक को सद्भावपूर्वक दिया गया भाटक
- 51. त्रुटियुक्त हकों के अधीन सद्भावपूर्वक धारकों द्वारा की गयी अभिवृद्धियाँ
- 52. सम्पत्ति-संबंधी वाद के लम्बित रहते हुए सम्पत्ति का अन्तरण
- 53. कपटपूर्ण अन्तरण
- 53A. भागिक पालन