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TPA धारा 19: निहित हित

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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19. निहित हित -

जहां कि किसी सम्पत्ति अन्तरण से किसी व्यक्ति के पक्ष में उस सम्पत्ति में कोई हित, वह समय विनिर्दिष्ट किए बिना, जब से वह प्रभावी होगा, या शब्दों में यह विनिर्दिष्ट करते हुए कि वह तत्काल या किसी ऐसी घटना होने पर, जो अवश्यंभावी है, प्रभावी होगा, सृष्ट किया जाता है, वहां जब तक कि अन्तरण के निर्बन्धनो से प्रतिकूल आशय प्रतीत न होता हो, ऐसा हित निहित हित है।

निहित हित कब्जा अभिप्राप्त करने से पहले अन्तरिती की मृत्यु हो जाने से विफल नहीं हो जाता।

स्पष्टीकरण -

केवल ऐसे उपबन्ध से, जिसके द्वारा हित का उपभोग मुल्तवी किया जाता है, या उसी सम्पत्ति में कोई पूर्विक हित किसी अन्य व्यक्ति के लिए दिया जाता या आरक्षित किया जाता है, या उस सम्पत्ति से उद्भूत आय को उस समय तक संचित किए जाने का निदेश किया जाता है, जब तक उपभोग का समय नहीं आ जाता, या केवल ऐसे किसी उपबन्ध से कि यदि कोई विशेष घटना घटित हो जाए तो वह हित किसी अन्य व्यक्ति को संक्रान्त हो जाएगा; यह आशय कि हित निहित नहीं होगा अनुमित न किया जाएगा।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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