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TPA धारा 11: स्रष्ट हित के विरुद्ध निर्बन्धन

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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11. स्रष्ट हित के विरुद्ध निर्बन्धन -

जहां कि सम्पत्ति के अन्तरण पर उस सम्पत्ति में किसी व्यक्ति के पक्ष में हित आत्यन्तिक्तः सृष्ट किया जाता हो, किन्तु अन्तरण के निर्बन्धन निदेश करते हों कि वह ऐसे हित का किसी विशिष्ट रीति से उपयोजन या उपभोग करे, वहां वह ऐसे हित को ऐसे प्राप्त और व्ययनित करने का हकदार होगा मानो ऐसा कोई निदेश वा ही नहीं।

जहां कि ऐसा कोई निदेश स्थावर सम्पत्ति के एक टुकड़े के बारे में उस सम्पत्ति के दूसरे टुकड़े के फायदाप्रद उपभोग को सुनिश्चित करने के प्रयोजन से किया गया हो, वहां इस धारा की कोई भी बात किसी ऐसे अधिकार पर, जो अन्तरक ऐसे निदेश का प्रवर्तन कराने के लिए रखता हो, या किसी ऐसे उपचार पर, जो वह उसके भंग के बारे में रखता हो, प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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