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TPA धारा 43: अप्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण, जो अन्तरित सम्पत्ति में पीछे हित अर्जित कर लेता है

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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43. अप्राधिकृत व्यक्ति द्वारा अन्तरण, जो अन्तरित सम्पत्ति में पीछे हित अर्जित कर लेता है-

जहाँ कि कोई व्यक्ति कपटपूर्वक या भूलवश यह व्यपदेश करता है कि वह अमुक स्थावर सम्पत्ति को अन्तरित करने के लिए प्राधिकृत है और ऐसी सम्पत्ति को प्रतिफलार्थ अन्तरित करने की प्रव्यंजना करता है, वहाँ ऐसा अन्तरण, अन्तरिती के विकल्प पर किसी भी उस हित पर प्रवृत्त होगा, जिसे अन्तरक ऐसी सम्पत्ति में उतने समय के दौरान कभी भी अर्जित करे जितने समय तक उस अन्तरण की संविदा अस्तित्व में रहती है।

इस धारा की कोई भी बात उक्त विकल्प के अस्तित्व की सूचना न रखने वाले सद्भावपूर्ण सप्रतिफल अन्तरितियों के आधार का ह्रास न करेगी।

दृष्टान्त

क, जो हिन्दू है और अपने पिता ख से पृथक् हो गया है, तीन खेत, क्ष, त्र और ज्ञ यह व्यपदेशन करते हुए ग को बेच देता है, कि क उन्हें अन्तरित करने के लिए प्राधिकृत है। इन खेतों में से ज्ञ खेत क का नहीं है, क्योंकि विभाजन के समय ख ने इसे अपने लिए प्रतिधृत कर लिया था; किन्तु ख के मरने पर वारिस के रूप में ज्ञ को क प्राप्त कर लेता है। ग ने विक्रय संविदा को विखंडित नहीं किया है, इसलिए वह क से अपेक्षा कर सकेगा कि क उसे ज्ञ को परिदत्त करे।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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