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TPA धारा 40: भूमि के उपयोग पर निर्बन्धन लगाने वाली बाध्यता का या स्वामित्व से उपाबद्ध

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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40. भूमि के उपयोग पर निर्बन्धन लगाने वाली बाध्यता का या स्वामित्व से उपाबद्ध-

जहाँ कि अपनी निजी स्थावर सम्पत्ति के अधिक फायदाप्रद उपभोग के लिए किसी अन्य व्यक्ति का किसी दूसरे व्यक्ति की स्थावर सम्पत्ति में के किसी हित या सुखाचार पर अनाश्रित यह अधिकार हो कि वह पश्चात्‌कथित सम्पत्ति का किसी विशिष्ट रीति से उपभोग किए जाने पर अवरोध लगा दे; अथवा

किन्तु हित या सुखाचार की कोटि में न आने वाली बाध्यता का बोझ -

जहाँ कि अन्य व्यक्ति ऐसी बाध्यता से फायदा उठाने का हकदार हो, जो संविदा से उद्भूत होता है और स्थावर सम्पत्ति के स्वामित्व से उपाबद्ध है किन्तु जो उसमें हित या सुखाचार की कोटि में नहीं आता;

वहाँ ऐसा अधिकार या बाध्यता ऐसे अन्तरिती के विरुद्ध तो प्रवर्तित की जा सकेगी, जिसको उसकी सूचना है या जो उस सम्पत्ति का, जिस पर तद्द्वारा प्रभाव पड़ा है आनुग्रहिक अन्तरिती है किन्तु उस अन्तरिती के विरुद्ध नहीं जो सप्रतिफल है और जिसे अधिकार या बाध्यता की सूचना नहीं है और न उसके हाथ में की वैसी सम्पत्ति के विरुद्ध।

दृष्टान्त

ख को सुल्तानपुर बेचने की संविदा क करता है। संविदा के प्रवर्तन में होते हुए भी वह सुल्तानपुर को ग को, जिसे संविदा की सूचना है, बेच देता है। ख संविदा को ग के विरुद्ध उसी विस्तार तक प्रवर्तित करा सकेगा जिस तक वह क के विरुद्ध प्रवर्तित करा सकता है।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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