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TPA धारा 17: संचयन के लिए निवेश

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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17. संचयन के लिए निवेश -

(1) जहां कि सम्पत्ति के किसी अन्तरण के निबन्धन निर्दिष्ट करते हैं कि उस सम्पत्ति से उद्भूत आय-

(क) अन्तरक के जीवन से, या

(ख) अन्तरण की तारीख से अठारह वर्ष की कालावधि से, अधिक कालावधि तक पूर्णतः या भागतः संचित की जाएगी, वहां एतस्मिन्पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय ऐसा निदेश वहां तक शून्य होगा, जहां तक कि वह कालावधि, जिसके दौरान संचय करना निदिष्ट है, पूर्वोक्त कालावधियों में से दीर्घतर कालावधि से अधिक हो और ऐसी अन्तिम वर्णित कालावधि का अन्त होने पर वह सम्पत्ति और उसकी आय इस प्रकार व्ययनित की जाएगी मानो वह कालावधि, जिसके दौरान संचय करना निर्दिष्ट किया गया है, बीत गई है।

(2) यह धारा ऐसे किसी निदेश पर प्रभाव न डालेगी जो

(i) अन्तरक के ऋणों का या अन्तरण के अधीन कोई हित पाने वाले किसी अन्य व्यक्ति के ऋणों का संदाय करने के, अथवा

(ii) अन्तक के या अन्तरण के अधीन कोई हित पाने वाले किसी अन्य व्यक्ति के पुत्र-पुत्रियों या दूरतर सन्तति के लिए भागों का उपबन्ध करने के, अथवा

(iii) अन्तरित सम्पत्ति के परिरक्षण या अनुरक्षण के, प्रयोजन से संचय करने के लिए हो, और ऐसा निदेश तदनुकूल किया जा सकेगा ।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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