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TPA धारा 21: समाश्रित हित

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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21. समाश्रित हित -

जहां कि संपत्ति अंतरण से उस संपत्ति में किसी व्यक्ति के पक्ष में हित विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित न होने पर ही अथवा किसी विनिर्दिष्ट अनिश्चित घटना के घटित न होने पर ही प्रभावी होने के लिए सृष्ट किया गया हो, वहां ऐसा व्यक्ति तद्द्द्वारा उस संपत्ति में समावित हित अर्जित करता है। ऐसा हित पूर्व कथित दशा में उस घटना के घटित होने पर और पश्चात् कथित दशा में उस घटना का घटित होना असम्भव हो जाने पर निहित हित हो जाता है।

अपवाद –

जहां कि संपत्ति अंतरण के अधीन कोई व्यक्ति उस संपत्ति में किसी हित का हकदार कोई विशिष्ट आयु प्राप्त करने पर हो जाता है, और अन्तरक उसको वह आय भी आत्यन्तिकतः देता है जो उसके वह आयु प्राप्त करने से पहले ऐसे हित से उद्भूत हो यह निदेश देता है कि वह आय या उसमें से उतनी जितनी आवश्यक हो, उसके फायदे के लिए उपयोजित की जाए, वहां ऐसा हित समाश्रित हित नहीं है।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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