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TPA धारा 53: कपटपूर्ण अन्तरण

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 2: पक्षकारों के कार्य द्वारा संपत्ति-अंतरण

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53. कपटपूर्ण अन्तरण -

(1) स्थावर सम्पत्ति का हर एक ऐसा अन्तरण, जो अन्तरक के लेनदारों को विफल करने या उन्हें देरी कराने के आशय से किया गया है, ऐसे किसी भी लेनदार के विकल्प पर शून्यकरणीय होगा जिसे इस प्रकार विफल या देरी कराई गई है।

इस उपधारा की कोई भी बात किसी सद्भावपूर्ण सप्रतिफल अन्तरिती के अधिकारों का हास न करेगी।

इस उपधारा की कोई भी बात दिवाला संबंधी किसी तत्समय प्रवृत्त-विधि पर प्रभाव नहीं डालेगी। वह वाद, जो किसी लेनदार ने (जिस शब्द के अन्तर्गत डिक्रीदार आता है, चाहे उसने अपनी डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन किया हो या नहीं) किसी अन्तरण को इस आधार पर शून्य कराने के लिए संस्थित किया है कि वह अन्तरण, अन्तरक के लेनदारों को विफल करने या उन्हें देरी कराने के आशय से किया गया है, उन सब लेनदारों की ओर से या के फायदे के लिए संस्थित किया जाएगा।

(2) स्थावर सम्पत्ति का हर एक ऐसा अन्तरण, जो पाश्चिक अन्तरिती को कपटवंचित करने के आशय से प्रतिफल के बिना किया गया है, ऐसे अन्तरिती के विकल्प पर शून्यकरणीय होगा।

प्रतिफल के बिना किया गया कोई अन्तरण इस धारा के प्रयोजनों के लिए केवल इस कारण से ही कपटवंचित करने के आशय से किया गया न समझा जाएगा कि कोई पाश्चिक अन्तरण प्रतिफलार्थ किया गया था।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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