TPA अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार
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इस अध्याय का विषय
बंधक दायित्व की प्रतिभूति के लिए विशिष्ट स्थावर संपत्ति में हित का अंतरण है; वह विक्रय का दूसरा नाम नहीं है।
मुख्य प्रावधान
- धारा 58. 'बन्धक', 'बन्धककर्त्ता', 'बन्धकदार', 'बन्धक धन' और 'बन्धक विलेख' की परिभाषा
- धारा 59. बन्धक कब हस्तान्तरण-पत्र द्वारा किया जाना चाहिए
- धारा 59A. बन्धककर्त्ताओं और बन्धकदारों के प्रति निर्देशों के अन्तर्गत वे व्यक्ति भी हैं जिन्हें उनसे हक व्युत्पन्न हुआ है
- धारा 60. मोचन करने का बन्धककर्ता का अधिकार
- धारा 60A. बन्धककर्त्ता को प्रति-अन्तरण करने के बजाय किसी तृतीय पक्षकार को अन्तरण करने की बाध्यता
- धारा 60B. दस्तावेजों के निरीक्षण और पेश कराने का अधिकार
- धारा 61. पृथक्तया या साथ-साथ मोचन कराने का अधिकार
- धारा 62. कब्जा प्रत्युद्धरण का भोग-बन्धककर्त्ता का अधिकार
- धारा 63. बन्धक सम्पत्ति में अनुवृद्धि
- धारा 63A. बन्धक सम्पत्ति में अभिवृद्धि
- धारा 64. बन्धकित पट्टे का नवीकरण
- धारा 65. बन्धककर्त्ता द्वारा विवक्षित संविदाएँ
- धारा 65A. बंधककर्त्ता की पट्टा करने की शक्ति
- धारा 66. कब्जा रखने वाले बंधककर्त्ता द्वारा दुर्व्यय
- धारा 67. पुरोबंध या विक्रय का अधिकार
- धारा 67A. बंधकदार कई बंधकों के आधार पर एक वाद लाने को कब आबद्ध होता है
- धारा 68. बंधक-धन के लिए वाद लाने का अधिकार
- धारा 69. विक्रय करने की शक्ति कब विधिमान्य होती है
- धारा 69A. रिसीवर की नियुक्ति
- धारा 70. बंधक-सम्पत्ति में अनुवृद्धि
- धारा 71. बन्धकित पट्टे का नवीकरण
- धारा 72. सकब्जा बन्धकदार के अधिकार
- धारा 73. राजस्व के लिए किए गए विक्रय के आगमों पर या अर्जन पर प्रतिकर पर अधिकार
- धारा 74. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 39 द्वारा निरसित
- धारा 75. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 39 द्वारा निरसित
- धारा 76. सकब्जा बन्धकदार का दायित्व
- धारा 77. ब्याज के बदले में प्राप्तियाँ
- धारा 78. पूर्विक बंधकदार का मुल्तवी होना
- धारा 79. जब कि अधिकतम रकम अभिव्यक्त है, तब अनिश्चित रकम को प्रतिभूत करने के लिए बंधक
- धारा 80. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 41 द्वारा निरसित
- धारा 81. प्रतिभूतियों का क्रमबंधन
- धारा 82. बंधक ऋण की बाबत अभिदाय
- धारा 83. बंधक मद्दे शोध्य धन का न्यायालय में निक्षेप करने की शक्ति
- धारा 84. ब्याज का बन्द हो जाना
- धारा 85. (सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (1908 का 5) की धारा 156 तथा अनुसूची 5 द्वारा निरसित)
- धारा 86. निरसित धारा
- धारा 87. निरसित धारा
- धारा 88. निरसित धारा
- धारा 89. निरसित धारा
- धारा 90. निरसित धारा
- धारा 91. वे व्यक्ति जो मोचन के लिए वाद ला सकेंगे
- धारा 92. प्रत्यासन
- धारा 93. आबंधन का प्रतिषेध
- धारा 94. मध्यवर्ती बन्धकदार के अधिकार
- धारा 95. मोचन कराने वाले सह-बन्धककर्त्ता का व्यय पाने का अधिकार
- धारा 96. हक-विलेखों के निक्षेप द्वारा बन्धक
- धारा 97. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) की धारा 156 तथा पाँचवीं अनुसूची द्वारा निरसित
- धारा 98. विलक्षण बन्धकों के पक्षकारों के अधिकार और दायित्व
- धारा 99. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) की धारा 156 तथा पांचवीं अनुसूची द्वारा निरसित
- धारा 100. भार
- धारा 101. पाश्चिक विल्लंगमों के विद्यमान होने पर विलयन न होगा
- धारा 102. अभिकर्त्ता पर तामील या उसकी निविदा
- धारा 103. संविदा करने के लिए अक्षम व्यक्ति को या उस द्वारा सूचना इत्यादि
- धारा 104. नियम बनाने की शक्ति
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 4: अभ्यास
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आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें