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TPA धारा 62: कब्जा प्रत्युद्धरण का भोग-बन्धककर्त्ता का अधिकार

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार

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62.कब्जाप्रत्युद्धरणकाभोग-बन्धककर्त्ताकाअधिकार-

भोग बन्धक की दशा में बन्धककर्ता को यह अधिकार है कि वह बन्धक विलेख और बन्धक सम्पत्ति संबंधी सब दस्तावेजों के सति, जो बन्धकदार के कब्जे या शक्ति में हों, उस सम्पत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण कर ले-

(क) जहाँ कि बन्धकदार सम्पत्ति के भाटकों और लाभों से बंधक धन का भुगतान स्वयं कर लेने के लिए प्राधिकृत है वहाँ तब जब ऐसे धन का भुगतान हो गया हो,

(ख) जहाँ कि बन्धकदार ऐसे भाटकों और लाभों से या उनके किसी भाग से बन्धक धन के केवल किसी भाग का भुगतान स्वयं कर लेने के लिए प्राधिकृत है, वहाँ तब जब बन्धक धन के संदाय के लिए विहित कालावधि का (यदि कोई हो) अवसान हो गया हो और बन्धककर्ता बन्धक धन या उसका कोई अतिशेष बन्धकदारों को दे दे या निविदत्त कर दे या जैसा कि एतस्मिन्पश्चात् उपबन्धित है, न्यायालय में निक्षिप्त कर दे।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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