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TPA धारा 60A: बन्धककर्त्ता को प्रति-अन्तरण करने के बजाय किसी तृतीय पक्षकार को अन्तरण करने की बाध्यता

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार

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60क. बन्धककर्त्ता को प्रति-अन्तरण करने के बजाय किसी तृतीय पक्षकार को अन्तरण करने की बाध्यता -

(1) जहाँ कि बन्धककर्त्ता मोचन के लिए हकदार है, वहाँ उन किन्हीं शतों की पूर्ति पर, जिनकी पूर्ति पर वह प्रति-अन्तरण कराने की अपेक्षा करने का हकदार हो जाता है, वह बन्धकदार से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस सम्पत्ति को प्रति अन्तरित करने के बजाय, ऐसे अन्य व्यक्ति को जिसे बन्धककर्ता निर्दिष्ट करे, बन्धक ऋण समनुदेशित करे और बन्धक सम्पत्ति अन्तरित करे, तथा बन्धकदार तद्‌नुसार समनुदेशन और अन्तरण करने के लिए आबद्ध होगा।

(2) इस धारा द्वारा प्रदत्त अधिकार बन्धककर्ता और विल्लंगमदार के होंगे और किसी मध्यवर्ती विल्लंगम के होते हुए भी बन्धककर्ता द्वारा या किसी भी विल्लंगम द्वारा प्रवर्तित कराए जा सकेंगे, किन्तु किसी विल्लंगमदार द्वारा की गई अपेक्षा बन्धककर्त्ता द्वारा की गई अपेक्षा पर अभिभावी होगी और जहाँ तक विल्लंगमदारों के बीच का संबंध है पूर्विक विल्लंगमदारों की अपेक्षा पाश्चिक विल्लंगमदारों की अपेक्षा पर अभिभावी होगी।

(3) इस धारा के उपबन्ध उस बन्धकदार के बारे में लागू नहीं होते जिसका कब्जा है या रहा है।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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