TPA धारा 68: बंधक-धन के लिए वाद लाने का अधिकार
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार
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68. बंधक-धन के लिए वाद लाने का अधिकार -
(1) बन्धक-धन के लिए वाद लाने का अधिकार बन्धकदार को निम्नलिखित दशाओं में ही है, अन्य दशाओं में नहीं, अर्थात्-
(क) जहाँ कि बंधककर्ता बंधक-धन के प्रति संदाय के लिए अपने आपको आबद्ध करता है,
(ख) जहाँ कि बंधककर्ता या बंधकदार के सदोष कार्य या व्यतिक्रम से भिन्न किसी हेतुक से बंधक-सम्पत्ति पूर्णतः या भागतः नष्ट हो जाती है या प्रतिभूति धारा 66 के अर्थ के अन्दर अपर्याप्त हो जाती है और बंधकदार ने बंधककर्ता को इतनी अतिरिक्त प्रतिभूति देने के लिए, जितनी से कुल प्रतिभूति पर्याप्त हो जाए, युक्तियुक्त अवसर दिया है, और बंधककर्ता ऐसा करने में असफल रहा है;
(ग) जहाँ कि बंधकदार अपनी पूर्ण प्रतिभूति से या उसके किसी भाग से बंधककर्त्ता के सदोष कार्य या व्यतिक्रम के द्वारा या परिणामस्वरूप वंचित कर दिया गया है;
(घ) जहाँ कि बंधकदार बंधक सम्पत्ति पर कब्जे का हकदार है वहाँ यदि बन्धककर्त्ता उसे उसका परिदान करने में अथवा बधककर्त्ता या बंधककर्ता के हक से वरिष्ठ हक के अधीन दावा करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा किए गये विघ्न के बिना उस पर कब्जा सुनिश्चित कराने में असफल रहता है:
परन्तु खंड (क) में निर्देशित दशा में बंधककर्ता का या उसके विधिक प्रतिनिधि का कोई अन्तरिती इस दायित्व के अधीन न होगा कि बंधक-धन के लिए उस पर वाद चलाया जाए।
(2) जहाँ कि वाद उपधारा (1) के खंड (क) या खण्ड (ख) के अधीन लाया जाता है, वहाँ यदि बंधकदार अपनी प्रतिभूति का परित्याग नहीं कर देता और यदि आवश्यकता हो तो बंधक-सम्पत्ति का प्रति-अन्तरण नहीं कर देता वाद और उसमें की सब कार्यवाहियों को, किसी तत्प्रतिकूल संविदा के होते हुए भी, न्यायालय स्वविवेक से तब तक के लिए रोक सकेगा जब तक बंधकदार बंधक सम्पत्ति या उसमें से शेष जो बची हो, उसके विरुद्ध अपने सब उपलभ्य उपचारों को निःशेष नहीं कर देता है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 58. 'बन्धक', 'बन्धककर्त्ता', 'बन्धकदार', 'बन्धक धन' और 'बन्धक विलेख' की परिभाषा
- 59. बन्धक कब हस्तान्तरण-पत्र द्वारा किया जाना चाहिए
- 59A. बन्धककर्त्ताओं और बन्धकदारों के प्रति निर्देशों के अन्तर्गत वे व्यक्ति भी हैं जिन्हें उनसे हक व्युत्पन्न हुआ है
- 60. मोचन करने का बन्धककर्ता का अधिकार
- 60A. बन्धककर्त्ता को प्रति-अन्तरण करने के बजाय किसी तृतीय पक्षकार को अन्तरण करने की बाध्यता
- 60B. दस्तावेजों के निरीक्षण और पेश कराने का अधिकार
- 61. पृथक्तया या साथ-साथ मोचन कराने का अधिकार
- 62. कब्जा प्रत्युद्धरण का भोग-बन्धककर्त्ता का अधिकार
- 63. बन्धक सम्पत्ति में अनुवृद्धि
- 63A. बन्धक सम्पत्ति में अभिवृद्धि
- 64. बन्धकित पट्टे का नवीकरण
- 65. बन्धककर्त्ता द्वारा विवक्षित संविदाएँ
- 65A. बंधककर्त्ता की पट्टा करने की शक्ति
- 66. कब्जा रखने वाले बंधककर्त्ता द्वारा दुर्व्यय
- 67. पुरोबंध या विक्रय का अधिकार
- 67A. बंधकदार कई बंधकों के आधार पर एक वाद लाने को कब आबद्ध होता है
- 69. विक्रय करने की शक्ति कब विधिमान्य होती है
- 69A. रिसीवर की नियुक्ति
- 70. बंधक-सम्पत्ति में अनुवृद्धि
- 71. बन्धकित पट्टे का नवीकरण
- 72. सकब्जा बन्धकदार के अधिकार
- 73. राजस्व के लिए किए गए विक्रय के आगमों पर या अर्जन पर प्रतिकर पर अधिकार
- 74. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 39 द्वारा निरसित
- 75. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 39 द्वारा निरसित
- 76. सकब्जा बन्धकदार का दायित्व
- 77. ब्याज के बदले में प्राप्तियाँ
- 78. पूर्विक बंधकदार का मुल्तवी होना
- 79. जब कि अधिकतम रकम अभिव्यक्त है, तब अनिश्चित रकम को प्रतिभूत करने के लिए बंधक
- 80. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 41 द्वारा निरसित
- 81. प्रतिभूतियों का क्रमबंधन
- 82. बंधक ऋण की बाबत अभिदाय
- 83. बंधक मद्दे शोध्य धन का न्यायालय में निक्षेप करने की शक्ति
- 84. ब्याज का बन्द हो जाना
- 85. (सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (1908 का 5) की धारा 156 तथा अनुसूची 5 द्वारा निरसित)
- 86. निरसित धारा
- 87. निरसित धारा
- 88. निरसित धारा
- 89. निरसित धारा
- 90. निरसित धारा
- 91. वे व्यक्ति जो मोचन के लिए वाद ला सकेंगे
- 92. प्रत्यासन
- 93. आबंधन का प्रतिषेध
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- 95. मोचन कराने वाले सह-बन्धककर्त्ता का व्यय पाने का अधिकार
- 96. हक-विलेखों के निक्षेप द्वारा बन्धक
- 97. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) की धारा 156 तथा पाँचवीं अनुसूची द्वारा निरसित
- 98. विलक्षण बन्धकों के पक्षकारों के अधिकार और दायित्व
- 99. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) की धारा 156 तथा पांचवीं अनुसूची द्वारा निरसित
- 100. भार
- 101. पाश्चिक विल्लंगमों के विद्यमान होने पर विलयन न होगा
- 102. अभिकर्त्ता पर तामील या उसकी निविदा
- 103. संविदा करने के लिए अक्षम व्यक्ति को या उस द्वारा सूचना इत्यादि
- 104. नियम बनाने की शक्ति