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TPA धारा 73: राजस्व के लिए किए गए विक्रय के आगमों पर या अर्जन पर प्रतिकर पर अधिकार

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार

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73. राजस्व के लिए किए गए विक्रय के आगमों पर या अर्जन पर प्रतिकर पर अधिकार -

(1) जहाँ कि बंधक सम्पत्ति या उसका कोई भाग या उसमें का कोई हित ऐसी सम्पत्ति के बारे में राजस्व की बकाया या लोक-प्रकृति के अन्य प्रभार या शोध्य भाटक देने में असफलता के कारण बेचा जाता है, और ऐसी असफलता बंधकदार के किसी व्यतिक्रम से उत्पन्न नहीं हुई है, वहाँ बंधकदार उस बकाया के और विधि द्वारा निर्दिष्ट सब प्रभारों और कटौतियों के संदाय के पश्चात् विक्रय आगमों में जो कुछ अधिशेष रहे उसमें से बंधक-धन के पूर्णतः या भागतः दिए जाने का दावा करने का हकदार होगा।

(2) जहाँ कि बंधक सम्पत्ति या उसका कोई भाग या उसमें का कोई हित भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) या स्थावर सम्पत्ति के आवश्यक अर्जन करने के लिए उपबंध करने वाली किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त अधिनियमिति के अधीन अर्जित किया जाता है, वहाँ बंधकदार बंधककर्त्ता को प्रतिकर के रूप में शोध्य रकम में से बंधक-धन के पूर्णतः या भागतः संदाय का दावा करने का हकदार होगा।

(3) ऐसे दावे पूर्विक विल्लंगमदारों के दावों के सिवाय अन्य सब दावों के विरुद्ध अभिभावी होंगे और इस बात के होते हुए भी कि बंधक पर मूलधन शोध्य नहीं हुआ है, प्रवर्तित किए जा सकेंगे।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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