TPA धारा 72: सकब्जा बन्धकदार के अधिकार
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार
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72. सकब्जा बन्धकदार के अधिकार-
बंधकदार इतना धन व्यय कर सकेगा जितना-
(ख) नाश, समपहरण या विक्रय से बंधक सम्पत्ति का परिरक्षण करने के लिए;
(ग) उस सम्पत्ति पर बंधककर्ता के हक के समर्थन के लिए;
(घ) उसमें स्वयं अपने हक को बंधककर्त्ता के विरुद्ध पक्का करने के लिए; तथा
(ङ) जबकि बंधक-सम्पत्ति नवीकरणीय पट्टाधृति है तब पट्टे के नवीकरण के लिए, आवश्यक है, और तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो ऐसे धन को मूलधन में जोड़ सकेगा; उस धन पर ऐसी दर से जो मूलधन पर देय है, और जहाँ कि ऐसी कोई दर नियत न हो, वहाँ नौ प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज लगेगाः
परन्तु बंधकदार द्वारा खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन किया गया धन का व्यय आवश्यक न समझा जाएगा, जब तक कि बंधककर्ता सम्पत्ति को परिरक्षित करने के लिए या हक का समर्थन करने के लिए अपेक्षित न किया गया हो और वह तदर्थ उचित और यथासमय पग उठाने में असफल न हो गया हो।
जहाँ कि सम्पत्ति अपनी प्रकृति से बीमा योग्य है, वहाँ तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो बंधकदार ऐसी सब सम्पत्ति या उसके किसी भाग को हानि या नुकसान के लिए, जो अग्नि से हो, बीमाकृत भी कर और रख सकेगा और किसी ऐसे बीमे के लिए दिए गए प्रीमियम उसी दर से, जो मूलधन पर देय है, या जहाँ कि ऐसी दर नियत नहीं है वहाँ नौ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज सहित मूलधन में जोड़े जाएंगे। किन्तु ऐसे बीमे की रकम उस रकम से अधिक न होगी जो बंधक विलेख में इस निमित्त विनिर्दिष्ट है या (यदि ऐसी कोई रकम उसमें विनिर्दिष्ट न हो तो) उस रकम के दो-तिहाई से अधिक न होगी जो पूर्ण नाश की दशा में बीमाकृत सम्पत्ति के पुनःस्थापित करने के लिए अपेक्षित होती।
इस धारा की कोई भी बात बंधकदार को बीमा कराने के लिए प्राधिकृत करने वाली न समझी जाएगी, जब कि सम्पत्ति का बीमा बन्धककर्त्ता द्वारा या बंधककर्ता की ओर से उतनी रकम का किया हुआ रखा जाता है जितने के लिए बंधकदार बीमा कराने के लिए एतद्वारा प्राधिकृत है।
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
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- 60B. दस्तावेजों के निरीक्षण और पेश कराने का अधिकार
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- 69. विक्रय करने की शक्ति कब विधिमान्य होती है
- 69A. रिसीवर की नियुक्ति
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- 78. पूर्विक बंधकदार का मुल्तवी होना
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- 82. बंधक ऋण की बाबत अभिदाय
- 83. बंधक मद्दे शोध्य धन का न्यायालय में निक्षेप करने की शक्ति
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