TPA धारा 65A: बंधककर्त्ता की पट्टा करने की शक्ति
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 4: स्थावर संपत्ति के बंधक और भार
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65क. बंधककर्त्ता की पट्टा करने की शक्ति -
(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन जब बन्धककर्ता का बन्धक सम्पत्ति पर विधिपूर्ण रूप से कब्जा हो, तब उसकी यह शक्ति होगी कि उसे पट्टों पर दे दे, जो पट्टे बन्धकदार पर आबद्धकर होंगे।
(2) (क) हर ऐसा पट्टा ऐसा होगा जो सम्पृक्त सपत्ति के प्रबन्ध के मामूली अनुक्रम में और किसी स्थानीय विधि, रूढ़ि या प्रथा के अनुसार किया जाता;
(ख) हर ऐसे पट्टे में वह सर्वोत्तम भाटक आरक्षित होगा जो युक्तियुक्ततः अभिप्राप्त किया जा सकता हो और कोई भी प्रीमियम न तो दिया जाएगा और न उसके लिए वचन दिया जाएगा तथा कोई भी भाटक अग्रिम देय नहीं होगा;
(ग) किसी भी ऐसे पट्टे में नवीकरण के लिए प्रसंविदा अन्तर्विष्ट नहीं होगी;
(घ) हर ऐसा पट्टा ऐसी तारीख से प्रभावी होगा जो उसके लिए किए जाने की तारीख से छः मास से अधिक पश्चात् की न हो;
(ङ) निर्माणों के पट्टे की दशा में, चाहे वे उस भूमि के, जिस पर वे स्थित हैं, सहित या बिना पट्टे पर दिए गए हों, पट्टे की अस्तित्वावधि किसी दशा में भी तीन वर्ष से अधिक की न होगी और पट्टे में भाटक देने के लिए प्रसंविदा और उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर भाटक न चुकाए जाने पर पुनः प्रवेश करने की शर्त अन्तर्विष्ट होगी।
(3) उपधारा (1) के उपबन्ध केवल तभी और वहीं तक लागू होते हैं जब और जहाँ तक कि बन्धक-विलेख में कोई तत्प्रतिकूल आशय अभिव्यक्त न किया गया हो और उपधारा (2) के उपबन्धों में फेरफार या उनका विस्तारण बन्धक विलेख द्वारा किया जा सकेगा और इस प्रकार फेरफार किए गए या विस्तारित उपबन्ध यावत्रशक्य वैसे ही प्रकार से और वैसी ही प्रसंगतियों, प्रभावों और परिणामों के सहित प्रवर्तित हों, मानो ऐसे फेरफार या विस्तारण उस उपधारा में अन्तर्विष्ट हों।
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 58. 'बन्धक', 'बन्धककर्त्ता', 'बन्धकदार', 'बन्धक धन' और 'बन्धक विलेख' की परिभाषा
- 59. बन्धक कब हस्तान्तरण-पत्र द्वारा किया जाना चाहिए
- 59A. बन्धककर्त्ताओं और बन्धकदारों के प्रति निर्देशों के अन्तर्गत वे व्यक्ति भी हैं जिन्हें उनसे हक व्युत्पन्न हुआ है
- 60. मोचन करने का बन्धककर्ता का अधिकार
- 60A. बन्धककर्त्ता को प्रति-अन्तरण करने के बजाय किसी तृतीय पक्षकार को अन्तरण करने की बाध्यता
- 60B. दस्तावेजों के निरीक्षण और पेश कराने का अधिकार
- 61. पृथक्तया या साथ-साथ मोचन कराने का अधिकार
- 62. कब्जा प्रत्युद्धरण का भोग-बन्धककर्त्ता का अधिकार
- 63. बन्धक सम्पत्ति में अनुवृद्धि
- 63A. बन्धक सम्पत्ति में अभिवृद्धि
- 64. बन्धकित पट्टे का नवीकरण
- 65. बन्धककर्त्ता द्वारा विवक्षित संविदाएँ
- 66. कब्जा रखने वाले बंधककर्त्ता द्वारा दुर्व्यय
- 67. पुरोबंध या विक्रय का अधिकार
- 67A. बंधकदार कई बंधकों के आधार पर एक वाद लाने को कब आबद्ध होता है
- 68. बंधक-धन के लिए वाद लाने का अधिकार
- 69. विक्रय करने की शक्ति कब विधिमान्य होती है
- 69A. रिसीवर की नियुक्ति
- 70. बंधक-सम्पत्ति में अनुवृद्धि
- 71. बन्धकित पट्टे का नवीकरण
- 72. सकब्जा बन्धकदार के अधिकार
- 73. राजस्व के लिए किए गए विक्रय के आगमों पर या अर्जन पर प्रतिकर पर अधिकार
- 74. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 39 द्वारा निरसित
- 75. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 39 द्वारा निरसित
- 76. सकब्जा बन्धकदार का दायित्व
- 77. ब्याज के बदले में प्राप्तियाँ
- 78. पूर्विक बंधकदार का मुल्तवी होना
- 79. जब कि अधिकतम रकम अभिव्यक्त है, तब अनिश्चित रकम को प्रतिभूत करने के लिए बंधक
- 80. सम्पत्ति अन्तरण (संशोधन) अधिनियम, 1929 (1929 का 20) की धारा 41 द्वारा निरसित
- 81. प्रतिभूतियों का क्रमबंधन
- 82. बंधक ऋण की बाबत अभिदाय
- 83. बंधक मद्दे शोध्य धन का न्यायालय में निक्षेप करने की शक्ति
- 84. ब्याज का बन्द हो जाना
- 85. (सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (1908 का 5) की धारा 156 तथा अनुसूची 5 द्वारा निरसित)
- 86. निरसित धारा
- 87. निरसित धारा
- 88. निरसित धारा
- 89. निरसित धारा
- 90. निरसित धारा
- 91. वे व्यक्ति जो मोचन के लिए वाद ला सकेंगे
- 92. प्रत्यासन
- 93. आबंधन का प्रतिषेध
- 94. मध्यवर्ती बन्धकदार के अधिकार
- 95. मोचन कराने वाले सह-बन्धककर्त्ता का व्यय पाने का अधिकार
- 96. हक-विलेखों के निक्षेप द्वारा बन्धक
- 97. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) की धारा 156 तथा पाँचवीं अनुसूची द्वारा निरसित
- 98. विलक्षण बन्धकों के पक्षकारों के अधिकार और दायित्व
- 99. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) की धारा 156 तथा पांचवीं अनुसूची द्वारा निरसित
- 100. भार
- 101. पाश्चिक विल्लंगमों के विद्यमान होने पर विलयन न होगा
- 102. अभिकर्त्ता पर तामील या उसकी निविदा
- 103. संविदा करने के लिए अक्षम व्यक्ति को या उस द्वारा सूचना इत्यादि
- 104. नियम बनाने की शक्ति