BNSS धारा 366: न्यायालय खुला रहेगा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान
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366. (1) जिस स्थान पर किसी अपराध की जांच या मुकदमा चलाने के उद्देश्य से कोई आपराधिक न्यायालय आयोजित किया जाता है, उसे एक खुला न्यायालय माना जाएगा, जहां तक आम तौर पर जनता की पहुंच हो सकती है, जहां तक उसे सुविधाजनक रूप से शामिल किया जा सकता है उन्हें:
बशर्ते कि पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, यदि वह उचित समझे, किसी विशेष मामले की किसी भी जांच या सुनवाई के किसी भी चरण में आदेश दे सकता है, कि आम तौर पर जनता या किसी विशेष व्यक्ति की पहुंच नहीं होगी, या नहीं होगी। न्यायालय द्वारा उपयोग किए जाने वाले कमरे या भवन में रहें।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, भारतीय न्याय संहिता की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 71 के तहत बलात्कार या अपराध की जांच और मुकदमा , 2023 या यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 4, 6, 8 या धारा 10 के तहत कैमरे में आयोजित किया जाएगा:
बशर्ते कि पीठासीन न्यायाधीश, यदि वह उचित समझे, या किसी भी पक्ष द्वारा किए गए आवेदन पर, किसी विशेष व्यक्ति को न्यायालय द्वारा उपयोग किए जाने वाले कमरे या भवन तक पहुंचने या उसमें रहने की अनुमति दे सकता है:
बशर्ते कि बंद कमरे में सुनवाई यथासंभव महिला न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी।
(3) जहां उप-धारा (2) के तहत कोई कार्यवाही की जाती है, किसी भी व्यक्ति के लिए न्यायालय की पूर्व अनुमति के अलावा ऐसी किसी भी कार्यवाही के संबंध में किसी भी मामले को मुद्रित या प्रकाशित करना वैध नहीं होगा:
बशर्ते कि पार्टियों के नाम और पते की गोपनीयता बनाए रखने के अधीन, बलात्कार के अपराध के संबंध में मुकदमे की कार्यवाही के मुद्रण या प्रकाशन पर प्रतिबंध हटाया जा सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 337. एक बार दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने पर व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जाएगा
- 338. लोक अभियोजकों द्वारा उपस्थिति
- 339. अभियोजन चलाने की अनुमति
- 340. उस व्यक्ति का बचाव करने का अधिकार जिसके खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई है
- 341. कुछ मामलों में राज्य के खर्च पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता
- 342. प्रक्रिया जब निगम या पंजीकृत सोसायटी आरोपी हो
- 343. साथी को क्षमादान देना
- 344. क्षमादान की निविदा निर्देशित करने की शक्ति
- 345. क्षमा की शर्तों का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना
- 346. कार्यवाही स्थगित या स्थगित करने की शक्ति
- 347. स्थानीय निरीक्षण
- 348. महत्वपूर्ण गवाह को बुलाने या उपस्थित व्यक्ति की जांच करने की शक्ति
- 349. किसी व्यक्ति को हस्ताक्षर या लिखावट आदि का नमूना देने का आदेश देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति
- 350. शिकायतकर्ताओं और गवाहों का खर्च
- 351. आरोपी से पूछताछ करने की शक्ति
- 352. मौखिक तर्क और तर्क का ज्ञापन
- 353. आरोपी व्यक्ति सक्षम गवाह होगा
- 354. प्रकटीकरण को प्रेरित करने के लिए किसी प्रभाव का उपयोग नहीं किया जाएगा
- 355. कुछ मामलों में अभियुक्तों की अनुपस्थिति में पूछताछ और सुनवाई का प्रावधान
- 356. घोषित अपराधी की अनुपस्थिति में पूछताछ, मुकदमा या निर्णय
- 357. प्रक्रिया जहां अभियुक्त कार्यवाही को नहीं समझता है
- 358. अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने की शक्ति
- 359. अपराधों का शमन
- 360. अभियोजन से वापसी
- 361. उन मामलों में प्रक्रिया जिनका निपटान मजिस्ट्रेट नहीं कर सकते
- 362. प्रक्रिया जब जांच या सुनवाई शुरू होने के बाद, मजिस्ट्रेट को लगता है कि मामला कमिट किया जाना चाहिए
- 363. सिक्के, स्टांप-कानून या संपत्ति के खिलाफ अपराधों के लिए पहले दोषी ठहराए गए व्यक्तियों का मुकदमा
- 364. प्रक्रिया जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त रूप से गंभीर सजा नहीं दे सकता
- 365. आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्य पर दोषसिद्धि या प्रतिबद्धता