BNSS धारा 356: घोषित अपराधी की अनुपस्थिति में पूछताछ, मुकदमा या निर्णय

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान

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356. (1) इस संहिता में या उस समय लागू किसी भी अन्य कानून में किसी भी बात के बावजूद, जब कोई घोषित अपराधी घोषित किया गया हो, चाहे उस पर संयुक्त रूप से आरोप लगाया गया हो या नहीं, मुकदमे से बचने के लिए भाग गया है और उसकी तत्काल कोई संभावना नहीं है उसे गिरफ्तार करने पर, इसे ऐसे व्यक्ति के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और मुकदमा चलाने के अधिकार की छूट के रूप में माना जाएगा, और न्यायालय, न्याय के हित में, लिखित रूप में कारण दर्ज करने के बाद, मुकदमे की तरह आगे बढ़ेगा। ढंग से और ऐसे प्रभाव से मानो वह उपस्थित हो, इस संहिता के अंतर्गत और निर्णय सुनाए:
बशर्ते कि अदालत मुकदमा तब तक शुरू नहीं करेगी जब तक कि आरोप तय करने की तारीख से नब्बे दिन की अवधि समाप्त न हो जाए।
(2) न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि उप-धारा (1) के तहत आगे बढ़ने से पहले निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुपालन किया गया है, अर्थात्:—
(i) कम से कम तीस दिनों के अंतराल के भीतर गिरफ्तारी के लगातार दो वारंट जारी करना;
(ii) उसके निवास के अंतिम ज्ञात पते के स्थान पर प्रसारित होने वाले एक राष्ट्रीय या स्थानीय दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित करें, जिसमें घोषित अपराधी को मुकदमे के लिए न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता हो और उसे सूचित किया जाए कि यदि वह तारीख से तीस दिनों के भीतर उपस्थित होने में विफल रहता है। ऐसे प्रकाशन के बाद, मुकदमा उसकी अनुपस्थिति में शुरू होगा;
(iii) मुकदमे की शुरुआत के बारे में अपने रिश्तेदार या दोस्त को, यदि कोई हो, सूचित करेगा; और
(iv) जिस घर या रियासत में ऐसा व्यक्ति आम तौर पर रहता है, उसके कुछ विशिष्ट हिस्से पर मुकदमे की शुरुआत के बारे में जानकारी चिपकाएगा और उसके निवास के अंतिम ज्ञात पते वाले जिले के पुलिस स्टेशन में प्रदर्शित करेगा।
(3) जहां घोषित अपराधी का प्रतिनिधित्व किसी वकील द्वारा नहीं किया जाता है, उसे राज्य के खर्च पर अपने बचाव के लिए एक वकील उपलब्ध कराया जाएगा।
(4) जहां मामले की सुनवाई करने या मुकदमा चलाने के लिए सक्षम न्यायालय ने अभियोजन के लिए किसी भी गवाह की जांच की है और उनके बयान दर्ज किए हैं, ऐसे बयान ऐसे घोषित अपराधी के खिलाफ जांच में या मुकदमे में साक्ष्य के रूप में दिए जाएंगे। जिस अपराध का उस पर आरोप लगाया गया है:
बशर्ते कि यदि उद्घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया जाता है और ऐसे मुकदमे के दौरान अदालत में पेश किया जाता है या पेश किया जाता है, तो न्यायालय, न्याय के हित में, उसे किसी भी सबूत की जांच करने की अनुमति दे सकता है जो उसकी अनुपस्थिति में लिया गया हो।
(5) जहां कोई मुकदमा इस धारा के तहत किसी व्यक्ति से संबंधित है, वहां गवाह की गवाही और जांच, जहां तक संभव हो, ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड की जा सकती है और ऐसी रिकॉर्डिंग इस तरह से रखी जाएगी जैसा कि न्यायालय निर्देश दे सकता है।
(6) इस संहिता के तहत अपराधों के लिए अभियोजन में, उप-धारा (1) के तहत मुकदमा शुरू होने के बाद आरोपी की स्वैच्छिक अनुपस्थिति फैसले की घोषणा सहित मुकदमे को जारी रखने से नहीं रोकेगी, भले ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाए और पेश किया जाए या पेश किया जाए। ऐसे परीक्षण का निष्कर्ष.
(7) इस धारा के तहत फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की जाएगी जब तक कि घोषित अपराधी खुद को अपील की अदालत के सामने पेश नहीं करता:
बशर्ते कि सजा के खिलाफ कोई अपील फैसले की तारीख से तीन साल की समाप्ति के बाद नहीं होगी।
(8) राज्य, अधिसूचना द्वारा, इस धारा के प्रावधानों को धारा 84 की उपधारा (1) में उल्लिखित किसी भी भगोड़े तक बढ़ा सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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