BNSS धारा 352: मौखिक तर्क और तर्क का ज्ञापन

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान

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352. (1) कार्यवाही में कोई भी पक्ष, अपने साक्ष्य के समापन के बाद, जितनी जल्दी हो सके, संक्षिप्त मौखिक तर्कों को संबोधित कर सकता है, और मौखिक तर्कों को समाप्त करने से पहले, यदि कोई हो, न्यायालय की सेटिंग में एक ज्ञापन प्रस्तुत कर सकता है। संक्षिप्त रूप से और अलग-अलग शीर्षकों के तहत, उसके मामले के समर्थन में तर्क और ऐसे प्रत्येक ज्ञापन को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा।
(2) ऐसे प्रत्येक ज्ञापन की एक प्रति विपक्षी पक्ष को एक साथ प्रस्तुत की जाएगी
(3) लिखित तर्क दाखिल करने के उद्देश्य से कार्यवाही का कोई स्थगन तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि न्यायालय, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, ऐसा स्थगन देना आवश्यक न समझे।
(4) न्यायालय, यदि उसकी राय है कि मौखिक तर्क संक्षिप्त या प्रासंगिक नहीं हैं, तो ऐसे तर्कों को विनियमित कर सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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