BNSS धारा 355: कुछ मामलों में अभियुक्तों की अनुपस्थिति में पूछताछ और सुनवाई का प्रावधान

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान

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355. (1) इस संहिता के तहत किसी जांच या मुकदमे के किसी भी चरण में, यदि न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, दर्ज किए जाने वाले कारणों से संतुष्ट है, कि न्यायालय के समक्ष अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति न्याय के हित में आवश्यक नहीं है, या कि अभियुक्त लगातार अदालत में कार्यवाही में बाधा डालता है, तो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, यदि अभियुक्त का प्रतिनिधित्व एक वकील द्वारा किया जाता है, तो उसकी उपस्थिति से छूट दे सकता है और उसकी अनुपस्थिति में ऐसी जांच या परीक्षण के साथ आगे बढ़ सकता है, और किसी भी बाद के चरण में ऐसा कर सकता है। कार्यवाही, ऐसे आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश देती है।
(2) यदि ऐसे किसी मामले में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व किसी वकील द्वारा नहीं किया जाता है, या यदि न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति को आवश्यक मानता है, तो वह, यदि वह उचित समझे और उसके द्वारा दर्ज किए जाने वाले कारणों से, ऐसी जांच को स्थगित कर सकता है या मुकदमा चलाना, या आदेश देना कि ऐसे अभियुक्तों का मामला अलग से उठाया जाए या चलाया जाए।
स्पष्टीकरण।—इस धारा के प्रयोजन के लिए, अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति में ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के माध्यम से उपस्थिति शामिल है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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