BNSS धारा 349: किसी व्यक्ति को हस्ताक्षर या लिखावट आदि का नमूना देने का आदेश देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान
अन्य भाषाओं में भी: English
349. यदि प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट है कि, इस संहिता के तहत किसी भी जांच या कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए, आरोपी व्यक्ति सहित किसी भी व्यक्ति को नमूना हस्ताक्षर या उंगली के निशान या लिखावट या आवाज का नमूना देने का निर्देश देना समीचीन है। , वह उस आशय का आदेश दे सकता है और उस स्थिति में जिस व्यक्ति से आदेश संबंधित है उसे ऐसे आदेश में निर्दिष्ट समय और स्थान पर उपस्थित होना होगा या अपने हस्ताक्षर या उंगली के निशान या लिखावट या आवाज का नमूना देना होगा:
बशर्ते कि इस धारा के तहत कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि व्यक्ति को ऐसी जांच या कार्यवाही के संबंध में किसी समय गिरफ्तार नहीं किया गया हो:
बशर्ते कि मजिस्ट्रेट, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किए बिना ऐसा नमूना या सैंपल देने का आदेश दे सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 337. एक बार दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने पर व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जाएगा
- 338. लोक अभियोजकों द्वारा उपस्थिति
- 339. अभियोजन चलाने की अनुमति
- 340. उस व्यक्ति का बचाव करने का अधिकार जिसके खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई है
- 341. कुछ मामलों में राज्य के खर्च पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता
- 342. प्रक्रिया जब निगम या पंजीकृत सोसायटी आरोपी हो
- 343. साथी को क्षमादान देना
- 344. क्षमादान की निविदा निर्देशित करने की शक्ति
- 345. क्षमा की शर्तों का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना
- 346. कार्यवाही स्थगित या स्थगित करने की शक्ति
- 347. स्थानीय निरीक्षण
- 348. महत्वपूर्ण गवाह को बुलाने या उपस्थित व्यक्ति की जांच करने की शक्ति
- 350. शिकायतकर्ताओं और गवाहों का खर्च
- 351. आरोपी से पूछताछ करने की शक्ति
- 352. मौखिक तर्क और तर्क का ज्ञापन
- 353. आरोपी व्यक्ति सक्षम गवाह होगा
- 354. प्रकटीकरण को प्रेरित करने के लिए किसी प्रभाव का उपयोग नहीं किया जाएगा
- 355. कुछ मामलों में अभियुक्तों की अनुपस्थिति में पूछताछ और सुनवाई का प्रावधान
- 356. घोषित अपराधी की अनुपस्थिति में पूछताछ, मुकदमा या निर्णय
- 357. प्रक्रिया जहां अभियुक्त कार्यवाही को नहीं समझता है
- 358. अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने की शक्ति
- 359. अपराधों का शमन
- 360. अभियोजन से वापसी
- 361. उन मामलों में प्रक्रिया जिनका निपटान मजिस्ट्रेट नहीं कर सकते
- 362. प्रक्रिया जब जांच या सुनवाई शुरू होने के बाद, मजिस्ट्रेट को लगता है कि मामला कमिट किया जाना चाहिए
- 363. सिक्के, स्टांप-कानून या संपत्ति के खिलाफ अपराधों के लिए पहले दोषी ठहराए गए व्यक्तियों का मुकदमा
- 364. प्रक्रिया जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त रूप से गंभीर सजा नहीं दे सकता
- 365. आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्य पर दोषसिद्धि या प्रतिबद्धता
- 366. न्यायालय खुला रहेगा