BNSS धारा 351: आरोपी से पूछताछ करने की शक्ति

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान

अन्य भाषाओं में भी: English

351. (1) प्रत्येक पूछताछ या मुकदमे में, अभियुक्त को व्यक्तिगत रूप से उसके खिलाफ साक्ष्य में दिखाई देने वाली किसी भी परिस्थिति को समझाने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से, न्यायालय—
(ए) किसी भी स्तर पर, बिना पूर्व चेतावनी के अभियुक्त उससे ऐसे प्रश्न पूछ सकता है जैसा न्यायालय आवश्यक समझे;
(बी) अभियोजन पक्ष के गवाहों की जांच हो जाने के बाद और अपने बचाव के लिए बुलाए जाने से पहले, उससे मामले पर आम तौर पर पूछताछ की जाएगी:
बशर्ते कि समन मामले में, जहां न्यायालय ने अभियुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है, वह खंड (बी) के तहत उसकी परीक्षा से भी छूट दे सकता है।
(2) जब उप-धारा (1) के तहत आरोपी की जांच की जाती है तो उसे कोई शपथ नहीं दिलाई जाएगी।
(3) अभियुक्त ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करके, या उनके गलत उत्तर देकर स्वयं को दंड का भागी नहीं बनाएगा।
(4) अभियुक्त द्वारा दिए गए उत्तरों को ऐसी जांच या परीक्षण में ध्यान में रखा जा सकता है, और किसी अन्य अपराध की किसी अन्य जांच, या परीक्षण में उसके लिए या उसके खिलाफ साक्ष्य में रखा जा सकता है, जो ऐसे उत्तरों से पता चलता है कि उसने किया है। प्रतिबद्ध.
(5) न्यायालय अभियुक्त से पूछे जाने वाले प्रासंगिक प्रश्नों को तैयार करने में अभियोजक और बचाव वकील की मदद ले सकता है और न्यायालय इस धारा के पर्याप्त अनुपालन के रूप में अभियुक्त द्वारा लिखित बयान दाखिल करने की अनुमति दे सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

इस अध्याय की अन्य धाराएँ