BNSS धारा 361: उन मामलों में प्रक्रिया जिनका निपटान मजिस्ट्रेट नहीं कर सकते

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान

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361. (1) यदि, किसी जिले में मजिस्ट्रेट के समक्ष किसी अपराध या मुकदमे की जांच के दौरान, साक्ष्य उसे एक अनुमान की गारंटी देता प्रतीत होता है—
(ए) कि उसके पास मामले की सुनवाई करने या उसे सुनवाई के लिए सौंपने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है; या
(बी) यह मामला ऐसा है जिसकी सुनवाई जिले में किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा की जानी चाहिए या सुनवाई के लिए सौंपी जानी चाहिए; या
(सी) कि मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जानी चाहिए, वह कार्यवाही को रोक देगा और मामले को इसकी प्रकृति को समझाते हुए एक संक्षिप्त रिपोर्ट के साथ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या ऐसे अन्य मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करेगा, जिसका क्षेत्राधिकार मुख्य हो। न्यायिक मजिस्ट्रेट निर्देश देते हैं।
(2) जिस मजिस्ट्रेट के पास मामला प्रस्तुत किया गया है, यदि उसे अधिकार है, तो वह या तो स्वयं मामले की सुनवाई कर सकता है, या इसे अपने अधिकार क्षेत्र वाले किसी अधीनस्थ मजिस्ट्रेट के पास भेज सकता है, या अभियुक्त को मुकदमे के लिए सौंप सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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