BNSS धारा 360: अभियोजन से वापसी

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान

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360. किसी मामले का प्रभारी लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक, अदालत की सहमति से, फैसला सुनाए जाने से पहले किसी भी समय, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सामान्य तौर पर या किसी एक या अधिक के संबंध में मुकदमा चलाने से पीछे हट सकता है। वे अपराध जिनके लिए उस पर मुकदमा चलाया गया है; और, ऐसी वापसी पर,—
(ए) यदि यह आरोप तय होने से पहले किया गया है, तो आरोपी को ऐसे अपराध या अपराधों के संबंध में बरी कर दिया जाएगा;
(बी) यदि यह आरोप तय होने के बाद बनाया गया है, या जब इस संहिता के तहत किसी आरोप की आवश्यकता नहीं है, तो उसे ऐसे अपराध या अपराधों के संबंध में बरी कर दिया जाएगा:
बशर्ते कि जहां ऐसा अपराध हो—
(i) किसी ऐसे मामले से संबंधित किसी भी कानून के खिलाफ था जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है; या
(ii) किसी केंद्रीय अधिनियम के तहत जांच की गई थी; या
(iii) केंद्र सरकार की किसी भी संपत्ति का दुरुपयोग या विनाश, या क्षति शामिल है; या
(iv) केंद्र सरकार की सेवा में किसी व्यक्ति द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में कार्य करते समय या कार्य करने का इरादा रखते हुए अपराध किया गया था, और मामले के प्रभारी अभियोजक को केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त नहीं किया गया है, वह नहीं करेगा, जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा ऐसा करने की अनुमति न दी गई हो, वह अभियोजन से हटने के लिए अपनी सहमति के लिए न्यायालय में जाएगा और न्यायालय, सहमति देने से पहले, अभियोजक को निर्देश देगा कि वह केंद्र सरकार द्वारा अभियोजन से हटने के लिए दी गई अनुमति को उसके समक्ष प्रस्तुत करे। अभियोजन:
बशर्ते कि कोई भी अदालत मामले में पीड़ित को सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसी वापसी की अनुमति नहीं देगी।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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