BNSS धारा 348: महत्वपूर्ण गवाह को बुलाने या उपस्थित व्यक्ति की जांच करने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 26: पूछताछ और परीक्षण के संबंध में सामान्य प्रावधान
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348. कोई भी न्यायालय, इस संहिता के तहत किसी भी जांच, परीक्षण या अन्य कार्यवाही के किसी भी चरण में, किसी भी व्यक्ति को गवाह के रूप में बुला सकता है, या उपस्थिति में किसी भी व्यक्ति की जांच कर सकता है, भले ही उसे गवाह के रूप में नहीं बुलाया गया हो, या दोबारा बुला सकता है और दोबारा जांच कर सकता है। किसी भी व्यक्ति की पहले ही जांच की जा चुकी है; और न्यायालय ऐसे किसी भी व्यक्ति को बुलाएगा और उसकी जांच करेगा या उसे दोबारा बुलाएगा और दोबारा जांच करेगा यदि उसका साक्ष्य मामले के उचित निर्णय के लिए आवश्यक प्रतीत होता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 337. एक बार दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने पर व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जाएगा
- 338. लोक अभियोजकों द्वारा उपस्थिति
- 339. अभियोजन चलाने की अनुमति
- 340. उस व्यक्ति का बचाव करने का अधिकार जिसके खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई है
- 341. कुछ मामलों में राज्य के खर्च पर अभियुक्तों को कानूनी सहायता
- 342. प्रक्रिया जब निगम या पंजीकृत सोसायटी आरोपी हो
- 343. साथी को क्षमादान देना
- 344. क्षमादान की निविदा निर्देशित करने की शक्ति
- 345. क्षमा की शर्तों का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना
- 346. कार्यवाही स्थगित या स्थगित करने की शक्ति
- 347. स्थानीय निरीक्षण
- 349. किसी व्यक्ति को हस्ताक्षर या लिखावट आदि का नमूना देने का आदेश देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति
- 350. शिकायतकर्ताओं और गवाहों का खर्च
- 351. आरोपी से पूछताछ करने की शक्ति
- 352. मौखिक तर्क और तर्क का ज्ञापन
- 353. आरोपी व्यक्ति सक्षम गवाह होगा
- 354. प्रकटीकरण को प्रेरित करने के लिए किसी प्रभाव का उपयोग नहीं किया जाएगा
- 355. कुछ मामलों में अभियुक्तों की अनुपस्थिति में पूछताछ और सुनवाई का प्रावधान
- 356. घोषित अपराधी की अनुपस्थिति में पूछताछ, मुकदमा या निर्णय
- 357. प्रक्रिया जहां अभियुक्त कार्यवाही को नहीं समझता है
- 358. अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने की शक्ति
- 359. अपराधों का शमन
- 360. अभियोजन से वापसी
- 361. उन मामलों में प्रक्रिया जिनका निपटान मजिस्ट्रेट नहीं कर सकते
- 362. प्रक्रिया जब जांच या सुनवाई शुरू होने के बाद, मजिस्ट्रेट को लगता है कि मामला कमिट किया जाना चाहिए
- 363. सिक्के, स्टांप-कानून या संपत्ति के खिलाफ अपराधों के लिए पहले दोषी ठहराए गए व्यक्तियों का मुकदमा
- 364. प्रक्रिया जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त रूप से गंभीर सजा नहीं दे सकता
- 365. आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा दर्ज किए गए साक्ष्य पर दोषसिद्धि या प्रतिबद्धता
- 366. न्यायालय खुला रहेगा