BNSS धारा 319: जब गवाह की उपस्थिति को समाप्त किया जा सकता है और कमीशन जारी किया जा सकता है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 25: पूछताछ और परीक्षण में साक्ष्य

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319. (1) जब भी, इस संहिता के तहत किसी जांच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के दौरान, किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के उद्देश्य के लिए किसी गवाह की परीक्षा आवश्यक है, और ऐसे गवाह की उपस्थिति देरी, व्यय या असुविधा के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है, जो मामले की परिस्थितियों में अनुचित होगा, न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसी उपस्थिति से छूट दे सकता है और प्रावधानों के अनुसार गवाह की परीक्षा के लिए एक कमीशन जारी कर सकता है। इस अध्याय का:
बशर्ते कि जहां भारत के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक की गवाह के रूप में परीक्षा न्याय के उद्देश्य के लिए आवश्यक हो, ऐसी जांच के लिए एक आयोग जारी किया जाएगा। गवाह.
(2) न्यायालय, अभियोजन पक्ष के गवाह की जांच के लिए एक कमीशन जारी करते समय, निर्देश दे सकता है कि वकील की फीस सहित अभियुक्त के खर्चों को पूरा करने के लिए अदालत जितनी राशि उचित समझे, अभियोजन द्वारा भुगतान किया जाए।< br>

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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