BNSS धारा 187: प्रक्रिया जब जांच चौबीस घंटे में पूरी नहीं की जा सकती

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 13: पुलिस को जानकारी और जांच करने की उनकी शक्तियां

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187. (1) जब भी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और हिरासत में रखा जाता है, और ऐसा प्रतीत होता है कि धारा 58 द्वारा निर्धारित चौबीस घंटे की अवधि के भीतर जांच पूरी नहीं की जा सकती है, और यह मानने के आधार हैं कि आरोप या जानकारी ठीक है - स्थापित, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी या जांच करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि वह उप-निरीक्षक के पद से नीचे नहीं है, तो वह तुरंत निकटतम न्यायिक मजिस्ट्रेट को संबंधित डायरी में इसके बाद निर्दिष्ट प्रविष्टियों की एक प्रति भेजेगा। मामले को, और साथ ही आरोपी को ऐसे मजिस्ट्रेट के पास भेज देगा।
(2) जिस न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास इस धारा के तहत किसी आरोपी व्यक्ति को भेजा जाता है, वह आरोपी व्यक्ति की स्थिति पर विचार करने के बाद कि क्या उसे रिहा नहीं किया गया है, इस बात की परवाह किए बिना कि उसके पास मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है या नहीं। जमानत या उसकी जमानत रद्द नहीं की गई है, समय-समय पर, अभियुक्त को ऐसी हिरासत में हिरासत में रखने के लिए अधिकृत करें, जैसा कि मजिस्ट्रेट उचित समझे, अवधि के दौरान किसी भी समय, पूरे या आंशिक रूप से पंद्रह दिनों से अधिक नहीं। जैसा भी मामला हो, साठ दिन या नब्बे दिन की हिरासत अवधि में से प्रारंभिक चालीस दिन या साठ दिन, जैसा कि उप-धारा (3) में प्रदान किया गया है, और यदि उसके पास मामले की सुनवाई करने या परीक्षण के लिए प्रतिबद्ध करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, और आगे की हिरासत को अनावश्यक मानता है, तो वह आरोपी को ऐसे क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजने का आदेश दे सकता है।
(3) यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट है कि ऐसा करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, तो वह पंद्रह दिनों की अवधि से परे आरोपी व्यक्ति की हिरासत को अधिकृत कर सकता है, लेकिन कोई भी मजिस्ट्रेट इस उप- के तहत आरोपी व्यक्ति को हिरासत में रखने के लिए अधिकृत नहीं करेगा। — से अधिक की कुल अवधि के लिए अनुभाग
(i) नब्बे दिन, जहां जांच मौत, आजीवन कारावास या कम से कम दस साल की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध से संबंधित है;
(ii) साठ दिन, जहां जांच किसी अन्य अपराध से संबंधित है, और, जैसा भी मामला हो, नब्बे दिन या साठ दिन की उक्त अवधि की समाप्ति पर, आरोपी व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा यदि वह तैयार है को और जमानत देता है, और इस उप-धारा के तहत जमानत पर रिहा किए गए प्रत्येक 5 व्यक्ति को उस अध्याय के प्रयोजनों के लिए अध्याय XXXIV के प्रावधानों के तहत रिहा किया गया माना जाएगा।
(4) कोई भी मजिस्ट्रेट इस धारा के तहत आरोपी को पुलिस की हिरासत में रखने की अनुमति नहीं देगा जब तक कि आरोपी को उसके सामने पहली बार व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं किया जाता है और उसके बाद हर बार जब तक आरोपी पुलिस की हिरासत में रहता है, लेकिन 10 मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक वीडियो लिंकेज के माध्यम से अभियुक्त के पेश होने पर न्यायिक हिरासत में आगे की हिरासत बढ़ा सकता है।
(5) द्वितीय श्रेणी का कोई भी मजिस्ट्रेट, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में विशेष रूप से सशक्त नहीं है, पुलिस की हिरासत में हिरासत को अधिकृत नहीं करेगा।
स्पष्टीकरण I.—संदेहों से बचने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि, 15 उपधारा (3) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के बावजूद, आरोपी को तब तक हिरासत में रखा जाएगा जब तक वह जमानत नहीं देता।< br>
स्पष्टीकरण II.—यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या उप-धारा (4) के तहत आवश्यक के रूप में एक आरोपी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था, तो आरोपी व्यक्ति का उत्पादन हिरासत को अधिकृत करने वाले आदेश पर उसके हस्ताक्षर या आदेश 20 द्वारा साबित किया जा सकता है। जैसा भी मामला हो, इलेक्ट्रॉनिक वीडियो लिंकेज के माध्यम से आरोपी व्यक्ति की पेशी के बारे में मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणित किया गया है:
बशर्ते कि अठारह वर्ष से कम उम्र की महिला के मामले में, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को रिमांड होम या मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्था की हिरासत में रखने का अधिकार होगा:
बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति को पॉलिसी हिरासत के तहत पुलिस स्टेशन 25 या न्यायिक हिरासत के तहत जेल में या केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा जेल के रूप में घोषित स्थान के अलावा अन्यथा हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
(6) उपधारा (1) से उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी या जांच करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि वह उप-निरीक्षक के पद से नीचे का नहीं है, जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं है, 30 निकटतम कार्यकारी मजिस्ट्रेट को, जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई हैं, मामले से संबंधित डायरी में इसके बाद निर्दिष्ट प्रविष्टि की एक प्रति भेज सकते हैं, और, उसी समय, आरोपी को ऐसे कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास भेज दें, और उसके बाद ऐसा कार्यकारी मजिस्ट्रेट, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, आरोपी व्यक्ति को ऐसी हिरासत में हिरासत में रखने के लिए अधिकृत कर सकता है, जिसे वह सात दिनों से अधिक 35 दिनों की अवधि के लिए उचित समझे। कुल में; और, इस प्रकार प्राधिकृत हिरासत की अवधि समाप्त होने पर, आरोपी व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा, सिवाय इसके कि जब ऐसे आदेश देने के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी व्यक्ति को और हिरासत में लेने का आदेश दिया गया हो; और, जहां इस तरह की और हिरासत के लिए आदेश दिया जाता है, वह अवधि जिसके दौरान इस उप-धारा के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट 40 द्वारा दिए गए आदेशों के तहत आरोपी व्यक्ति को हिरासत में रखा गया था, उप में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय ध्यान में रखा जाएगा। -अनुभाग (3):
बशर्ते कि उपरोक्त अवधि की समाप्ति से पहले, कार्यकारी मजिस्ट्रेट मामले के रिकॉर्ड को निकटतम न्यायिक मजिस्ट्रेट को मामले से संबंधित डायरी में प्रविष्टियों की एक प्रति के साथ भेज देगा जो कि 45 आरोप में अधिकारी द्वारा उसे प्रेषित किया गया था। जैसा भी मामला हो, पुलिस स्टेशन या जांच करने वाले पुलिस अधिकारी का।
(7) इस धारा के तहत पुलिस की हिरासत में हिरासत को अधिकृत करने वाला मजिस्ट्रेट ऐसा करने के अपने कारणों को दर्ज करेगा।
(8) ऐसा आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अलावा कोई भी मजिस्ट्रेट अपने आदेश की एक प्रति, इसे बनाने के कारणों सहित, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजेगा।
(9) यदि किसी मजिस्ट्रेट द्वारा सम्मन-मामले के रूप में विचारणीय किसी भी मामले में, जिस तारीख को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, उससे छह महीने की अवधि के भीतर जांच समाप्त नहीं होती है, तो मजिस्ट्रेट अपराध की आगे की जांच को रोकने का आदेश देगा। जब तक जांच करने वाला अधिकारी मजिस्ट्रेट को संतुष्ट नहीं कर देता कि विशेष कारणों से और न्याय के हित में जांच को छह महीने की अवधि से आगे जारी रखना आवश्यक है।
(10) जहां उप-धारा (9) के तहत किसी अपराध की आगे की जांच को रोकने का कोई आदेश दिया गया है, सत्र न्यायाधीश, यदि वह संतुष्ट है, तो उसे किए गए आवेदन पर या अन्यथा, कि अपराध की आगे की जांच होनी चाहिए किया जाए, उप-धारा (9) के तहत दिए गए आदेश को रद्द करें और जमानत और अन्य मामलों के संबंध में ऐसे निर्देशों के अधीन अपराध की आगे की जांच करने का निर्देश दें जो वह निर्दिष्ट कर सकते हैं।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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