BNSS धारा 192: जांच में कार्यवाही की डायरी
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 13: पुलिस को जानकारी और जांच करने की उनकी शक्तियां
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192. (1) इस अध्याय के तहत जांच करने वाला प्रत्येक पुलिस अधिकारी दिन-ब-दिन अपनी जांच की कार्यवाही को एक डायरी में दर्ज करेगा, जिसमें वह समय निर्धारित होगा जिस समय सूचना उस तक पहुंची, वह समय जब उसने अपनी जांच शुरू की और बंद की, उसके द्वारा दौरा किया गया स्थान या स्थान, और उसकी जांच के माध्यम से पता लगाए गए परिस्थितियों का एक बयान।
(2) धारा 180 के तहत जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान केस डायरी में डाले जाएंगे।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट डायरी एक खंड होगी और विधिवत पृष्ठांकित होगी।
(4) कोई भी आपराधिक न्यायालय ऐसे न्यायालय में जांच या सुनवाई के तहत किसी मामले की पुलिस डायरी भेज सकता है, और ऐसी डायरियों का उपयोग मामले में सबूत के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी जांच या सुनवाई में सहायता के लिए कर सकता है।
(5) न तो अभियुक्त और न ही उसके एजेंट ऐसी डायरियां मांगने के हकदार होंगे, न ही वह या वे उन्हें केवल इसलिए देखने के हकदार होंगे क्योंकि उन्हें न्यायालय द्वारा संदर्भित किया गया है; लेकिन, यदि उनका उपयोग उस पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाता है जिसने उन्हें अपनी याददाश्त ताज़ा करने के लिए बनाया है, या यदि न्यायालय उनका उपयोग ऐसे पुलिस अधिकारी का खंडन करने के उद्देश्य से करता है, तो धारा 148 या धारा 164 के प्रावधान, जैसा भी मामला हो, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 लागू होगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 173. संज्ञेय मामलों में जानकारी
- 174. गैर-संज्ञेय मामलों की जानकारी और ऐसे मामलों की जांच
- 175. पुलिस अधिकारी को संज्ञेय मामले की जांच करने की शक्ति
- 176. जांच की प्रक्रिया
- 177. रिपोर्ट कैसे सबमिट की गई
- 178. जांच या प्रारंभिक जांच करने की शक्ति
- 179. गवाहों की उपस्थिति की आवश्यकता के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति
- 180. पुलिस द्वारा गवाहों की जांच
- 181. पुलिस को बयान और उसका उपयोग
- 182. कोई प्रलोभन नहीं दिया जाएगा
- 183. स्वीकारोक्ति और बयानों की रिकॉर्डिंग
- 184. बलात्कार की पीड़िता की मेडिकल जांच
- 185. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
- 186. जब पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सर्च-वारंट जारी करने के लिए किसी अन्य की आवश्यकता हो सकती है
- 187. प्रक्रिया जब जांच चौबीस घंटे में पूरी नहीं की जा सकती
- 188. अधीनस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा जांच की रिपोर्ट
- 189. सबूत कम होने पर आरोपी को रिहा करना
- 190. पर्याप्त साक्ष्य होने पर मामले को मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाएगा
- 191. शिकायतकर्ता और गवाहों को पुलिस अधिकारी के साथ जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा
- 193. जांच पूरी होने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट
- 194. आत्महत्या आदि पर पुलिस जांच करेगी और रिपोर्ट करेगी
- 195. व्यक्तियों को बुलाने की शक्ति
- 196. मौत के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जांच