BNSS धारा 181: पुलिस को बयान और उसका उपयोग
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 13: पुलिस को जानकारी और जांच करने की उनकी शक्तियां
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181. (1) इस अध्याय के तहत जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी को दिया गया कोई भी बयान, यदि लिखित रूप में कम किया जाता है, तो इसे बनाने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा; न ही ऐसा कोई बयान या उसका कोई रिकॉर्ड, चाहे वह पुलिस डायरी में हो या अन्यथा, या ऐसे बयान या रिकॉर्ड का कोई भी हिस्सा, जांच के तहत किसी भी अपराध के संबंध में किसी भी जांच या परीक्षण में, इसके बाद प्रदान किए गए को छोड़कर, किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा। उस समय जब ऐसा बयान दिया गया था:
बशर्ते कि जब किसी गवाह को ऐसी जांच या मुकदमे में अभियोजन के लिए बुलाया जाता है, जिसका बयान पूर्वोक्त रूप से लिखित रूप में दिया गया है, तो उसके बयान का कोई भी हिस्सा, यदि विधिवत साबित हो, तो आरोपी द्वारा और अदालत की अनुमति से इस्तेमाल किया जा सकता है। अभियोजन पक्ष द्वारा, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 148 द्वारा प्रदान किए गए तरीके से ऐसे गवाह का खंडन करना; और जब ऐसे बयान के किसी भी भाग का उपयोग इस प्रकार किया जाता है, तो उसके किसी भी भाग का उपयोग ऐसे गवाह की पुन: परीक्षा में भी किया जा सकता है, लेकिन केवल उसकी जिरह में संदर्भित किसी भी मामले को समझाने के उद्देश्य से।
(2) इस धारा की कोई भी बात भारतीय साक्षात् अधिनियम, 2023 की धारा 26 के खंड (1) के प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले किसी भी कथन पर लागू नहीं मानी जाएगी; या उस अधिनियम की धारा 23 के प्रावधानों को प्रभावित करने के लिए।
स्पष्टीकरण.— उप-धारा (1) में निर्दिष्ट कथन में किसी तथ्य या परिस्थिति को बताने में चूक विरोधाभास की श्रेणी में आ सकती है यदि यह उस संदर्भ को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण और अन्यथा प्रासंगिक प्रतीत होता है जिसमें ऐसी चूक होती है और क्या कोई चूक विरोधाभास के समान है। किसी विशेष संदर्भ में विरोधाभास तथ्य का प्रश्न होगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 173. संज्ञेय मामलों में जानकारी
- 174. गैर-संज्ञेय मामलों की जानकारी और ऐसे मामलों की जांच
- 175. पुलिस अधिकारी को संज्ञेय मामले की जांच करने की शक्ति
- 176. जांच की प्रक्रिया
- 177. रिपोर्ट कैसे सबमिट की गई
- 178. जांच या प्रारंभिक जांच करने की शक्ति
- 179. गवाहों की उपस्थिति की आवश्यकता के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति
- 180. पुलिस द्वारा गवाहों की जांच
- 182. कोई प्रलोभन नहीं दिया जाएगा
- 183. स्वीकारोक्ति और बयानों की रिकॉर्डिंग
- 184. बलात्कार की पीड़िता की मेडिकल जांच
- 185. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
- 186. जब पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सर्च-वारंट जारी करने के लिए किसी अन्य की आवश्यकता हो सकती है
- 187. प्रक्रिया जब जांच चौबीस घंटे में पूरी नहीं की जा सकती
- 188. अधीनस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा जांच की रिपोर्ट
- 189. सबूत कम होने पर आरोपी को रिहा करना
- 190. पर्याप्त साक्ष्य होने पर मामले को मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाएगा
- 191. शिकायतकर्ता और गवाहों को पुलिस अधिकारी के साथ जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा
- 192. जांच में कार्यवाही की डायरी
- 193. जांच पूरी होने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट
- 194. आत्महत्या आदि पर पुलिस जांच करेगी और रिपोर्ट करेगी
- 195. व्यक्तियों को बुलाने की शक्ति
- 196. मौत के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जांच