BNSS धारा 189: सबूत कम होने पर आरोपी को रिहा करना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 13: पुलिस को जानकारी और जांच करने की उनकी शक्तियां
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189. यदि, इस अध्याय के तहत जांच करने पर, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के पास भेजने को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत या संदेह का उचित आधार नहीं है, तो ऐसा अधिकारी, यदि ऐसा हो व्यक्ति हिरासत में है, उसे जमानतदारों के साथ या उसके बिना, जैसा कि ऐसा अधिकारी निर्देश दे, एक बांड निष्पादित करने पर रिहा कर दें, यदि और जब भी आवश्यक हो, पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने के लिए, और अभियुक्त पर मुक़दमा चलाएँ या उसे मुक़दमे के लिए प्रतिबद्ध करें। 190. (1) यदि, इस अध्याय के तहत जांच करने पर, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि उपरोक्त के अनुसार पर्याप्त सबूत या उचित आधार है, तो ऐसा अधिकारी हिरासत में लिए गए आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेज देगा। आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान लेगा या उसे मुकदमे के लिए सौंप देगा, या, यदि अपराध जमानती है और आरोपी सुरक्षा देने में सक्षम है, तो निर्धारित दिन पर ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए उससे सुरक्षा लेगा। और ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष दिन-प्रतिदिन उसकी उपस्थिति के लिए जब तक कि अन्यथा निर्देश न दिया जाए:
बशर्ते कि यदि अभियुक्त हिरासत में नहीं है, तो पुलिस अधिकारी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी उपस्थिति के लिए ऐसे व्यक्ति से सुरक्षा लेगा और न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसे ऐसी रिपोर्ट भेजी गई है, इस आधार पर इसे स्वीकार करने से इनकार नहीं करेगा कि अभियुक्त है। हिरासत में नहीं लिया गया.
(2) जब किसी पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी किसी आरोपी व्यक्ति को न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या इस धारा के तहत ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी उपस्थिति के लिए सुरक्षा लेता है, तो वह ऐसे मजिस्ट्रेट को कोई भी हथियार या अन्य वस्तु भेज देगा जो उसके लिए आवश्यक हो। उसके सामने प्रस्तुत करें, और शिकायतकर्ता (यदि कोई हो) और ऐसे अधिकारी के सामने पेश होने वाले कई व्यक्तियों को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित होने की आवश्यकता होगी, जैसा कि वह आवश्यक समझे, न्यायिक के समक्ष उपस्थित होने के लिए एक बांड निष्पादित करने की आवश्यकता होगी। इसके अनुसार मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया कि आरोपी के खिलाफ आरोप के मामले में मुकदमा चलाया जाए या सबूत दिया जाए (जैसा भी मामला हो)।
(3) यदि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख बांड में किया गया है, तो ऐसे न्यायालय में किसी भी न्यायालय को शामिल माना जाएगा, जिसमें ऐसा मजिस्ट्रेट मामले को जांच या परीक्षण के लिए भेज सकता है, बशर्ते ऐसे संदर्भ की उचित सूचना ऐसे शिकायतकर्ता को दी गई हो। या व्यक्ति.
(4) वह अधिकारी, जिसकी उपस्थिति में बांड निष्पादित किया गया है, उसकी एक प्रति इसे निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से एक को देगा, और फिर अपनी रिपोर्ट के साथ मूल प्रति मजिस्ट्रेट को भेजेगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 173. संज्ञेय मामलों में जानकारी
- 174. गैर-संज्ञेय मामलों की जानकारी और ऐसे मामलों की जांच
- 175. पुलिस अधिकारी को संज्ञेय मामले की जांच करने की शक्ति
- 176. जांच की प्रक्रिया
- 177. रिपोर्ट कैसे सबमिट की गई
- 178. जांच या प्रारंभिक जांच करने की शक्ति
- 179. गवाहों की उपस्थिति की आवश्यकता के लिए पुलिस अधिकारी की शक्ति
- 180. पुलिस द्वारा गवाहों की जांच
- 181. पुलिस को बयान और उसका उपयोग
- 182. कोई प्रलोभन नहीं दिया जाएगा
- 183. स्वीकारोक्ति और बयानों की रिकॉर्डिंग
- 184. बलात्कार की पीड़िता की मेडिकल जांच
- 185. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
- 186. जब पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सर्च-वारंट जारी करने के लिए किसी अन्य की आवश्यकता हो सकती है
- 187. प्रक्रिया जब जांच चौबीस घंटे में पूरी नहीं की जा सकती
- 188. अधीनस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा जांच की रिपोर्ट
- 190. पर्याप्त साक्ष्य होने पर मामले को मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाएगा
- 191. शिकायतकर्ता और गवाहों को पुलिस अधिकारी के साथ जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा
- 192. जांच में कार्यवाही की डायरी
- 193. जांच पूरी होने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट
- 194. आत्महत्या आदि पर पुलिस जांच करेगी और रिपोर्ट करेगी
- 195. व्यक्तियों को बुलाने की शक्ति
- 196. मौत के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जांच