TPA धारा 116: अतिधारण का प्रभाव
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 5: स्थावर संपत्ति के पट्टे
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116. अतिधारण का प्रभाव -
यदि सम्पत्ति का पट्टेदार या उपपट्टेदार पट्टेदार को अनुदत्त पट्ट के पर्यवसान के पश्चात् उस पर अपना कब्जा बनाए रखता है और पट्टाकर्त्ता या उसका विधिक प्रतिनिधि पट्टेदार या उपपट्टेदार से भाटक प्रतिगृहीत करता है या कब्जा बनाए रखने के लिए अन्यथा उसको अनुमति देता है तो तत्प्रतिकूल करार के अभाव में पट्टा धारा 106 में यथा विनिर्दिष्ट उस प्रयोजन के अनुसार, जिसके लिए सम्पत्ति पट्टे पर दी गयी थी वर्षानुवर्ष या मासानुमास के लिए नवीकृत हो जाता है।
दृष्टान्त
(क) क एक गृह ख को पाँच वर्ष के लिए पट्टे पर देता है। ख वह गृह ग को 100 रुपए मासिक भाटक पर उपपट्टे पर देता है। पाँच वर्ष का अवसान हो जाता है किन्तु ग गृह पर कब्जा बनाए रखता है और क को भाटक देता है। ग का पट्टा मासानुमास नवीकृत होता रहता है।
(ख) ख को क एक फार्म ग के जीवन पर्यन्त के लिए पट्टे पर देता है। ग की मृत्यु हो जाती है, किन्तु क को अनुमति से ख कब्जा बनाए रखता है। ख का पट्टा वर्षानुवर्ष नवीकृत होता रहता है।
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 105. पट्टे की परिभाषा
- 106. लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के अभाव में कुछ पट्टों की कालावधि
- 107. पट्टे कैसे किए जाते हैं
- 108. पट्टाकर्त्ता और पट्टेवार के अधिकार और दायित्व
- 109. पट्टाकर्त्ता के अन्तरिती के अधिकार
- 110. उस दिन का अपवर्जन जिससे अवधि का प्रारम्भ होता है
- 111. पट्टे का पर्यवसान
- 112. समपहरण का अधित्यजन
- 113. छोड़ देने की सूचना का अधित्यजन
- 114. भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति
- 114A. कुछ अन्य दशाओं में समपहरण से मुक्ति
- 115. अभ्यर्पण और समपहरण का उपपट्टों पर प्रभाव
- 117. कृषि-प्रयोजनों वाले पट्टों को छूट