TPA धारा 106: लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के अभाव में कुछ पट्टों की कालावधि
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 5: स्थावर संपत्ति के पट्टे
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106. लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के अभाव में कुछ पट्टों की कालावधि-
(1) तत्प्रतिकूल संविदा या स्थानीय विधि या प्रथा न हो तो कृषि या विनिर्माण के प्रयोजनों के लिए स्थावर सम्पत्ति का पट्टा ऐसा वर्षानुवर्षी पट्टा समझा जाएगा जो या तो पट्टाकर्त्ता या पट्टेदार द्वारा छ: मास की सूचना द्वारा पर्यवसेय है, और किसी अन्य प्रयोजन के लिए स्थावर सम्पत्ति का पट्टा मासानुमासी पट्टा समझा जाएगा, जो या तो पट्टाकर्त्ता या पट्टेदार द्वारा पन्द्रह दिन की सूचना द्वारा पर्यवसेय है।
(2) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) में वर्णित कालावधि सूचना की प्राप्ति की तारीख से प्रारम्भ होगी।
(3) जहाँ कोई वाद या कार्यवाही उपधारा (1) में वर्णित कालावधि के अवसान के पश्चात् फाइल की गई है, वहां उस उपधारा के अधीन कोई सूचना केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं समझी जाएगी कि उसमें वर्णित कालावधि उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट कालावधि से कम है।
(4) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक सूचना लेखबद्ध और उसे देने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित होगी और उस पक्षकार को जिसे उसके द्वारा आबद्ध करना आशयित है या तो डाक द्वारा भेजी जाएगी या स्वयं उस पक्षकार को या
उसके कुटुम्बियों या नौकरों में से किसी एक को, उसके निवास पर निविदत्त या परिदत्त की जाएगी, या (यदि ऐसी निविदा या परिदान साध्य नहीं है तो) सम्पत्ति के किसी सहजदृश्य भाग पर लगा दी जाएगी।
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 105. पट्टे की परिभाषा
- 107. पट्टे कैसे किए जाते हैं
- 108. पट्टाकर्त्ता और पट्टेवार के अधिकार और दायित्व
- 109. पट्टाकर्त्ता के अन्तरिती के अधिकार
- 110. उस दिन का अपवर्जन जिससे अवधि का प्रारम्भ होता है
- 111. पट्टे का पर्यवसान
- 112. समपहरण का अधित्यजन
- 113. छोड़ देने की सूचना का अधित्यजन
- 114. भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति
- 114A. कुछ अन्य दशाओं में समपहरण से मुक्ति
- 115. अभ्यर्पण और समपहरण का उपपट्टों पर प्रभाव
- 116. अतिधारण का प्रभाव
- 117. कृषि-प्रयोजनों वाले पट्टों को छूट