TPA धारा 115: अभ्यर्पण और समपहरण का उपपट्टों पर प्रभाव
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 5: स्थावर संपत्ति के पट्टे
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115. अभ्यर्पण और समपहरण का उपपट्टों पर प्रभाव -
स्थावर सम्पत्ति के पट्टे के अभिव्यक्त या विवक्षित अभ्यर्पण का प्रतिकूल प्रभाव सम्पत्ति के या उसके किसी भाग के ऐसे उपपट्टे पर नहीं पड़ता, जो पट्टेदार द्वारा उन निबन्धनों और शर्तों पर पहले ही अनुदत्त कर दिया गया है जो (भाटक की रकम के बारे में के सिवाय) सारतः वे ही हैं. जो मूल पट्टे की हैं, किन्तु जब तक कि यह अभ्यर्पण नया पट्टा अभिप्राप्त करने के प्रयोजन से न किया गया हो उपपट्टेदार द्वारा देय भाटक और उसे आबद्ध करने वाली संविदाएं क्रमशः पट्टाकर्ता को देय और उसके द्वारा प्रवर्तनीय रहेंगी।
ऐसे पट्टे का समपहरण ऐसे सब उपपट्टे को वहाँ के सिवाय बातिल कर देता है जहाँ कि ऐसा समपहरण पट्टाकर्त्ता द्वारा उपपट्टेदारों को कपट वचित करने के लिए उपाप्त किया गया है या जहाँ कि समपहरण से मुक्ति धारा 114 के अधीन अनुदत्त की गई है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 105. पट्टे की परिभाषा
- 106. लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के अभाव में कुछ पट्टों की कालावधि
- 107. पट्टे कैसे किए जाते हैं
- 108. पट्टाकर्त्ता और पट्टेवार के अधिकार और दायित्व
- 109. पट्टाकर्त्ता के अन्तरिती के अधिकार
- 110. उस दिन का अपवर्जन जिससे अवधि का प्रारम्भ होता है
- 111. पट्टे का पर्यवसान
- 112. समपहरण का अधित्यजन
- 113. छोड़ देने की सूचना का अधित्यजन
- 114. भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति
- 114A. कुछ अन्य दशाओं में समपहरण से मुक्ति
- 116. अतिधारण का प्रभाव
- 117. कृषि-प्रयोजनों वाले पट्टों को छूट