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TPA धारा 114: भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति

संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 5: स्थावर संपत्ति के पट्टे

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114. भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति-

जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति के पट्टे का पर्यवसान भाटक न देने से समपहरण द्वारा हो गया है और प‌ट्टाकर्ता पट्टेदार को बेदखल करने के लिए वाद लाता है वहाँ यदि वाद को सुनवाई में पट्टेदार पट्टाकर्त्ता को बकाया भाटक उस पर ब्याज सहित और वाद के उसके पूरे खर्च दे देता है या निविदत्त करता है या ऐसी प्रतिभूति दे देता है जिससे न्यायालय ऐसा संदाय पन्द्रह दिन में किए जाने के लिए पर्याप्त समझता है, तो न्यायालय बेदखली के लिए डिक्री देने के बदले पट्टेदार को समपहरण से मुक्ति देने का आदेश दे सकेगा और तदुपरि पट्टेदार पट्टाकृत सम्पत्ति को ऐसे धारित करेगा मानो समपहरण हुआ ही नहीं था।

आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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