TPA धारा 112: समपहरण का अधित्यजन
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 5: स्थावर संपत्ति के पट्टे
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112. समपहरण का अधित्यजन-
धारा 111 के खण्ड (छ) के अधीन हुआ समपहरण उस भाटक के प्रतिग्रहण द्वारा, जो समपहरण की तिथि से शोध्य हो गया है, या ऐसे भाटक के लिए करस्थम् द्वारा या पट्टाकर्ता की तरफ से किसी ऐसे अन्य कार्य द्वारा, जिससे पट्टे को चालू मानने का उसका आशय दर्शित होता हो, अधित्यक्त हो जाता है:
परन्तु यह तब जब कि पट्टाकर्ता को यह जानकारी हो कि समपहरण उपगत हो गया है:
परन्तु यह और भी कि जहाँ कि पट्टेदार को समपहरण के आधार पर बेदखल करने के लिए वाद संस्थित किए जाने के पश्चात् भाटक प्रतिगृहीत कर लिया जाता है, वहाँ ऐसा प्रतिग्रहण अधित्यजन नहीं है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 105. पट्टे की परिभाषा
- 106. लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के अभाव में कुछ पट्टों की कालावधि
- 107. पट्टे कैसे किए जाते हैं
- 108. पट्टाकर्त्ता और पट्टेवार के अधिकार और दायित्व
- 109. पट्टाकर्त्ता के अन्तरिती के अधिकार
- 110. उस दिन का अपवर्जन जिससे अवधि का प्रारम्भ होता है
- 111. पट्टे का पर्यवसान
- 113. छोड़ देने की सूचना का अधित्यजन
- 114. भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति
- 114A. कुछ अन्य दशाओं में समपहरण से मुक्ति
- 115. अभ्यर्पण और समपहरण का उपपट्टों पर प्रभाव
- 116. अतिधारण का प्रभाव
- 117. कृषि-प्रयोजनों वाले पट्टों को छूट