TPA धारा 111: पट्टे का पर्यवसान
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 5: स्थावर संपत्ति के पट्टे
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111. पट्टे का पर्यवसान-
स्थावर सम्पत्ति के पट्टे का पर्यवसान हो जाता है-
(क) तद्द्वारा परिसीमित समय के बीत जाने से;
(ख) जहाँ कि ऐसा समय किसी घटना के घटित होने की शर्त पर परिसीमित है, वहाँ ऐसी घटना के घटित होने से;
(ग) जहाँ कि उस सम्पत्ति में पट्टाकर्ता के हित का पर्यवसान किसी घटना के घटित होने पर होता है या उसका व्ययन करने की उसकी शक्ति का विस्तार किसी घटना के घटित होने तक ही है वहाँ ऐसी घटना के घटित होने से;
(घ) उस दशा में, जब कि उस सम्पूर्ण सम्पत्ति में पट्टेदार और पट्टाकर्ता के हित एक ही व्यक्ति में, एक ही समय एक ही अधिकार के नाते निहित हो जाते हैं;
(ङ) अभिव्यक्त अभ्यर्पण द्वारा अर्थात् उस दशा में जब कि पट्टेदार पट्टे के अधीन अपना हित पारस्परिक करार द्वारा पट्टाकर्ता के प्रति छोड़ देता है;
(च) विवक्षित अभ्यर्पण द्वारा;
(छ) समपहरण द्वारा; अर्थात् (1) उस दशा में जब कि पट्टेदार किसी ऐसी अभिव्यक्त शर्त को भंग करता है, जिससे यह उपबन्धित है कि उसका भंग होने पर पट्यकर्ता पुनः प्रवेश कर सकेगा; या (2) उस दशा में, जब कि पट्टेदार किसी अन्य व्यक्ति का हक खड़ा करके या यह दावा करके कि वह स्वयं हकदार है अपनी पट्टेदारी हैसियत का त्याग करता है, या (3) जब कि पट्टेदार दिवालिया न्यायनिर्णीत हो जाता है और पट्टा यह उपबन्ध करता है कि पट्टाकर्ता ऐसी घटना के घटित होने पर पुनः प्रवेश कर सकेगा, और जबकि उन दशाओं में से किसी में पट्टाकर्ता या उसका अन्तरिती पट्टेदार को पट्टे का पर्यवसान करने के अपने आशय की लिखत सूचना देता है;
(ज) पट्टे का पर्यवसान करने या पट्टे पर दी गयी सम्पत्ति को छोड़ देने या छोड़ देने के आशय की एक पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार को सम्यक् रूप से दी गयी सूचना के अवसान पर।
खण्ड (च) का दृष्टान्त
पट्टाकृत सम्पत्ति का नया पट्टा एक पट्टेदार अपने पट्टाकर्ता से वर्तमान पट्टे के चालू रहने के दौरान प्रभावी होने के लिए प्रतिगृहीत करता है। यह पूर्वोक्त पट्टे का विवक्षित अभ्यर्पण है और उस पट्टे का तदुपरि पर्यवसान हो जाता है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ — जाँच की तारीख: 30 सितंबर 2026.अध्ययन के लिए Banaka का संपादित हिंदी पाठ, आधिकारिक समेकित संस्करण नहीं। पठनीय कानूनी HTML और सरकारी हिंदी संदर्भ से तैयार किया गया है; संख्या और संदर्भ की त्रुटियाँ सुधारी गई हैं। यह केंद्रीय पाठ है; राज्य संशोधन, क्षेत्रीय अधिसूचनाएँ और अन्य लागू कानून अलग देखें। जाँच की तारीख स्रोत-संस्करण की तारीख नहीं है।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 105. पट्टे की परिभाषा
- 106. लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के अभाव में कुछ पट्टों की कालावधि
- 107. पट्टे कैसे किए जाते हैं
- 108. पट्टाकर्त्ता और पट्टेवार के अधिकार और दायित्व
- 109. पट्टाकर्त्ता के अन्तरिती के अधिकार
- 110. उस दिन का अपवर्जन जिससे अवधि का प्रारम्भ होता है
- 112. समपहरण का अधित्यजन
- 113. छोड़ देने की सूचना का अधित्यजन
- 114. भाटक का संदाय न करने के कारण समपहरण से मुक्ति
- 114A. कुछ अन्य दशाओं में समपहरण से मुक्ति
- 115. अभ्यर्पण और समपहरण का उपपट्टों पर प्रभाव
- 116. अतिधारण का प्रभाव
- 117. कृषि-प्रयोजनों वाले पट्टों को छूट