NI Act धारा 44: धन के रूप में प्रतिफल का भागत: अभाव या निष्फल हो जाना
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार
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¶44. धन के रूप में प्रतिफल का भागत: अभाव या निष्फल हो जाना—जबकि वह प्रतिफल, जिसके लिए किसी व्यक्ति ने वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक को हस्ताक्षरित किया है, धन के रूप में या और प्रारम्भ में भागत: विद्यमान न था या तत्पश्चात् भागत: निष्फल हो गया है, तब वह राशि, जिसे ऐसे हस्ताक्षरकर्ता से अव्यवहित संबंध में स्थित धारक उससे पाने का हकदार होगा अनुपातत: कम हो जाती है ।
¶स्पष्टीकरण—विनिमय-पत्र का लेखीवाल प्रतिगृहीता से अव्यवहित संबंध में स्थित होता है । वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक का रचयिता पाने वाले से और पृष्ठांकक अपने पृष्ठांकिती से अव्यवहित संबंध में स्थित होता है । अन्य हस्ताक्षरकर्ता धारक से अव्यवहित संबंध में करार द्वारा स्थित हो सकेंगे ।
¶दृष्टांत
¶क अपने आदेशानुसार देय 500 रुपए का विनिमय-पत्र ख पर लिखता है । ख विनिमय-पत्र को प्रतिगृहीत कर लेता है । किन्तु तत्पश्चात् संदाय न करके उसे अनादृत कर देता है । क विनिमय-पत्र के आधार पर ख पर वाद लाता है । ख साबित कर देता है कि 400 रुपए के लिए तो वह मूल्यार्थ प्रतिगृहीत किया गया था और अवशिष्ट के लिए वादी के सौकर्य के लिए प्रतिगृहीत किया गया था । क केवल 400 रुपए वसूल कर सकता है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 26. वचन-पत्र आदि रचने आदि के लिए सामर्थ्य
- 27. अभिकरण
- 28. हस्ताक्षर करने वाले अभिकर्ता का दायित्व
- 29. हस्ताक्षर करने वाले विधिक प्रतिनिधि का दायित्व
- 30. लेखीवाल का दायित्व
- 31. चेक के ऊपरवाल का दायित्व
- 32. वचन-पत्र के रचयिता और विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता का दायित्व
- 33. केवल ऊपरवाल आवश्यकता में के या आदरणार्थ होने के सिवाय प्रतिगृहीता हो सकता है
- 34. जो ऊपरवाल भागीदार नहीं हैं उन द्वारा प्रतिग्रहण
- 35. पृष्ठांकक का दायित्व
- 36. सम्यक्-अनुक्रम-धारक के प्रति पूर्विक पक्षकारों का दायित्व
- 37. रचयिता, लेखीवाल और प्रतिगृहीता मूल ऋणी होंगे
- 38. हर एक पाश्चिक पक्षकार की बाबत पूर्विक पक्षकार मूल ऋणी होगा
- 39. प्रतिभूत्व
- 40. पृष्ठांकक के दायित्व का उन्मोचन
- 41. प्रतिगृहीता आबद्ध है यद्यपि पृष्ठांकन कूटरचित है
- 42. कल्पित नाम में लिखे गए विनिमय-पत्र का प्रतिग्रहण
- 43. परक्राम्य लिखत प्रतिफल के बिना रचित इत्यादि
- 45. जो प्रतिफल धन के रूप में नहीं है उसका भागत: निष्फल होना
- 45A. खोए हुए विनिमय-पत्र की दूसरी प्रति पाने का धारक का अधिकार