NI Act धारा 27: अभिकरण

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार

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27. अभिकरण—ऐसा हर व्यक्ति, जो अपने को आबद्ध करने के लिए या आबद्ध होने के लिए इस प्रकार समर्थ है, जैसा धारा 26 में वर्णित है, सम्यक् रूप से ऐसे प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा अपने आप को आबद्ध कर सकेगा या आबद्ध हो सकेगा जो उसके नाम में काम कर रहा है ।

कारबार संव्यवहृत करने और ऋणों को प्राप्त करने और उन्मोचित करने के लिए साधारण प्राधिकार से विनिमय-पत्र का ऐसा प्रतिग्रहण या पृष्ठांकन करने की शक्ति अभिकर्ता को प्राप्त नहीं होती जिससे उसका मालिक आबद्ध हो जाए ।

विनिमय-पत्रों के लिखने के प्राधिकार से स्वत: ही यह विवक्षित नहीं होता कि उसमें पृष्ठांकन करने का प्राधिकार है ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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