NI Act धारा 32: वचन-पत्र के रचयिता और विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता का दायित्व
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार
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¶32. वचन-पत्र के रचयिता और विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता का दायित्व—तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो वचन-पत्र का रचयिता और विनिमय-पत्र के परिपक्व होने के पूर्व उसका प्रतिगृहीता क्रमश: वचन-पत्र या प्रतिग्रहण के प्रकट शब्दों के अनुसार उसकी परिपक्वता पर उसकी रकम और विनिमय-पत्र का प्रतिगृहीता उसकी परिपक्वता पर या परिपक्वता के पश्चात् उसकी रकम धारक को मांग पर संदत्त करने के लिए आबद्ध है । पूर्वोक्त जैसे संदाय में व्यतिक्रम होने पर ऐसा रचयिता या प्रतिगृहीता वचन-पत्र या विनिमय-पत्र के किसी भी पक्षकार को किसी ऐसी हानि या नुकसान के लिए प्रतिकर देने के लिए आबद्ध है जो उसे उठाना पड़ा है और ऐसे व्यतिक्रम से हुआ है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 26. वचन-पत्र आदि रचने आदि के लिए सामर्थ्य
- 27. अभिकरण
- 28. हस्ताक्षर करने वाले अभिकर्ता का दायित्व
- 29. हस्ताक्षर करने वाले विधिक प्रतिनिधि का दायित्व
- 30. लेखीवाल का दायित्व
- 31. चेक के ऊपरवाल का दायित्व
- 33. केवल ऊपरवाल आवश्यकता में के या आदरणार्थ होने के सिवाय प्रतिगृहीता हो सकता है
- 34. जो ऊपरवाल भागीदार नहीं हैं उन द्वारा प्रतिग्रहण
- 35. पृष्ठांकक का दायित्व
- 36. सम्यक्-अनुक्रम-धारक के प्रति पूर्विक पक्षकारों का दायित्व
- 37. रचयिता, लेखीवाल और प्रतिगृहीता मूल ऋणी होंगे
- 38. हर एक पाश्चिक पक्षकार की बाबत पूर्विक पक्षकार मूल ऋणी होगा
- 39. प्रतिभूत्व
- 40. पृष्ठांकक के दायित्व का उन्मोचन
- 41. प्रतिगृहीता आबद्ध है यद्यपि पृष्ठांकन कूटरचित है
- 42. कल्पित नाम में लिखे गए विनिमय-पत्र का प्रतिग्रहण
- 43. परक्राम्य लिखत प्रतिफल के बिना रचित इत्यादि
- 44. धन के रूप में प्रतिफल का भागत: अभाव या निष्फल हो जाना
- 45. जो प्रतिफल धन के रूप में नहीं है उसका भागत: निष्फल होना
- 45A. खोए हुए विनिमय-पत्र की दूसरी प्रति पाने का धारक का अधिकार