NI Act धारा 26: वचन-पत्र आदि रचने आदि के लिए सामर्थ्य

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार

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26. वचन-पत्र आदि रचने आदि के लिए सामर्थ्य—ऐसा हर व्यक्ति, जो उस अवधि के अनुसार, जिसके वह अध्यधीन है, संविदा करने के लिए समर्थ है, वचन-पत्र, विनिमय-पत्र, या चेक की रचना, लेखन, प्रतिग्रहण, पृष्ठांकन, परिदान और परक्रामण करके अपने को आबद्ध कर सकेगा और आबद्ध हो सकेगा ।

अप्राप्तवय—अप्राप्तवय ऐसी लिखत का लेखन, पृष्ठांकन, परिदान और परक्रामण ऐसे कर सकेगा कि स्वयं उसके सिवाय सब पक्षकार आबद्ध हो जाएं ।

एतस्मिन् अन्तर्विष्ट कोई भी बात किसी निगम को इस बात के लिए सशक्त करने वाली न समझी जाएगी कि वह ऐसी दशाओं के सिवाय, जिसमें वह तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन ऐसा करने के लिए सशक्त हो ऐसी लिखतों का लेखन, पृष्ठांकन या प्रतिग्रहण कर सके ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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