NI Act धारा 38: हर एक पाश्चिक पक्षकार की बाबत पूर्विक पक्षकार मूल ऋणी होगा

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार

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38. हर एक पाश्चिक पक्षकार की बाबत पूर्विक पक्षकार मूल ऋणी होगा—प्रतिभुओं के रूप में ऐसे दायी पक्षकारों का जहां तक पारस्परिक संबंध है वहां तक हर एक पूर्विक पक्षकार, तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में उसके आधार पर हर एक पाश्चिक पक्षकार के प्रति मूल ऋणी के रूप में भी दायी है ।

दृष्टांत

क स्वयं अपने आदेशानुसार देय विनिमय-पत्र ख पर लिख देता है, जो उसे प्रतिगृहीत कर लेता है । तत्पश्चात् क विनिमय-पत्र को ग के नाम, ग, घ के नाम और घ, ङ के नाम पृष्ठांकित कर देता है । जहां तक ङ और ख का सम्बन्ध है, ख मूल ऋणी है और क, ग और घ उसके प्रतिभू हैं । जहां तक ङ और क का सम्बन्ध है क मूल ऋणी है और ग और घ उसके प्रतिभू हैं । जहां तक ङ और ग का सम्बन्ध है, ग मूल ऋणी है और घ उसका प्रतिभू है ।

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