NI Act धारा 39: प्रतिभूत्व

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार

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39. प्रतिभूत्व—जबकि प्रतिगृहीत विनिमय-पत्र का धारक प्रतिगृहीता से कोई ऐसी संविदा कर लेता है जिससे अन्य पक्षकार भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 134 या 135 के अधीन उन्मोचित हो जाते हों तब धारक अन्य पक्षकारों को भारित करने का अपना अधिकार अभिव्यक्तत: आरक्षित रख सकेगा और ऐसी दशा में वे उन्मोचित नहीं होते हैं ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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