NI Act धारा 43: परक्राम्य लिखत प्रतिफल के बिना रचित इत्यादि
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 3: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के पक्षकार
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¶43. परक्राम्य लिखत प्रतिफल के बिना रचित इत्यादि—प्रतिफल के बिना, या ऐसे प्रतिफल के लिए, जो निष्फल हो जाता है, रचित, लिखित, प्रतिगृहीत, पृष्ठांकित या अन्तरिम परक्राम्य लिखत उस संव्यवहार के पक्षकारों के बीच संदाय को कोई बाध्यता सृष्ट नहीं करती । किन्तु यदि ऐसे किसी पक्षकार ने किसी प्रतिफलार्थ धारक को वह लिखत पृष्ठांकन सहित या रहित अन्तरित कर दी है तो ऐसा धारक और उससे हक व्युत्पन्न करने वाला हर पाश्चिक धारक ऐसी लिखत पर शोध्य रकम प्रतिफलार्थ अन्तरक से या उस लिखत के किसी भी पूर्विक पक्षकार से वसूल कर सकेगा ।
¶अपवाद 1—जिस पक्षकार के सौकर्य के लिए परक्राम्य लिखत रची गई, लिखी गई, प्रतिगृहीत की गई या पृष्ठांकित की गई है, यदि उसने उसकी रकम का संदाय कर दिया है तो वह किसी भी ऐसे व्यक्ति से, जो उसके सौकर्य के लिए ऐसे लिखत का पक्षकार बना है, उस लिखत पर ऐसी रकम वसूल नहीं कर सकता ।
¶अपवाद 2—लिखत का कोई भी पक्षकार, जिससे किसी अन्य पक्षकार को ऐसे प्रतिफल के लिए, जिसे देने में या जिसका पूर्णत: पालन करने में वह असफल रहा है उसे अपने हक में रचने, लिखने, प्रतिगृहीत करने या पृष्ठांकित या अन्तरित करने के लिए उत्प्रेरित किया है, उस प्रतिफल के (यदि कोई हो) जो उसने वस्तुत: दिया है, या जिसका उसने वस्तुत: पालन किया है, मूल्य से अधिक रकम वसूल न करेगा ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 26. वचन-पत्र आदि रचने आदि के लिए सामर्थ्य
- 27. अभिकरण
- 28. हस्ताक्षर करने वाले अभिकर्ता का दायित्व
- 29. हस्ताक्षर करने वाले विधिक प्रतिनिधि का दायित्व
- 30. लेखीवाल का दायित्व
- 31. चेक के ऊपरवाल का दायित्व
- 32. वचन-पत्र के रचयिता और विनिमय-पत्र के प्रतिगृहीता का दायित्व
- 33. केवल ऊपरवाल आवश्यकता में के या आदरणार्थ होने के सिवाय प्रतिगृहीता हो सकता है
- 34. जो ऊपरवाल भागीदार नहीं हैं उन द्वारा प्रतिग्रहण
- 35. पृष्ठांकक का दायित्व
- 36. सम्यक्-अनुक्रम-धारक के प्रति पूर्विक पक्षकारों का दायित्व
- 37. रचयिता, लेखीवाल और प्रतिगृहीता मूल ऋणी होंगे
- 38. हर एक पाश्चिक पक्षकार की बाबत पूर्विक पक्षकार मूल ऋणी होगा
- 39. प्रतिभूत्व
- 40. पृष्ठांकक के दायित्व का उन्मोचन
- 41. प्रतिगृहीता आबद्ध है यद्यपि पृष्ठांकन कूटरचित है
- 42. कल्पित नाम में लिखे गए विनिमय-पत्र का प्रतिग्रहण
- 44. धन के रूप में प्रतिफल का भागत: अभाव या निष्फल हो जाना
- 45. जो प्रतिफल धन के रूप में नहीं है उसका भागत: निष्फल होना
- 45A. खोए हुए विनिमय-पत्र की दूसरी प्रति पाने का धारक का अधिकार